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भारत पर भारी टैरिफ का खतरा; जयशंकर का चौंकाने वाला जवाब!
By EditorialPublished on
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है। एक अमेरिकी सांसद ने चेतावनी दी है कि अगर भारत रूस से सामान खरीदता रहा और यूक्रेन की मदद नहीं करता, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में नया तनाव सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से सामान और विशेष रूप से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप के इस बयान को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने 2 जुलाई 2025 को वॉशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
जयशंकर का संयमित जवाब :
डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि भारत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के संपर्क में है और उन्हें भारत की ऊर्जा ज़रूरतों और सुरक्षा चिंताओं के बारे में अवगत करा दिया गया है। जयशंकर ने कहा, “हमने अपनी बात स्पष्ट कर दी है। जब हम उस पुल पर पहुंचेंगे, तो उसे पार करेंगे।” उनके इस बयान से साफ है कि भारत फिलहाल स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और अमेरिका के किसी भी संभावित निर्णय का अपने हितों के आधार पर जवाब देगा।
क्या कहा अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने ?
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने हाल ही में दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूस से व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैक्स लगाया जाएगा। ग्राहम ने कहा, "अगर आप रूस से सामान खरीद रहे हैं और यूक्रेन की मदद नहीं कर रहे हैं, तो अमेरिका आपके प्रोडक्ट्स पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा।" उन्होंने भारत और चीन दोनों को इस संदर्भ में चेतावनी देते हुए कहा कि ये दोनों देश रूस से लगभग 70 प्रतिशत तेल खरीदते हैं, जिससे पुतिन की युद्ध मशीन को समर्थन मिल रहा है।
रूस से भारत का तेल आयात क्यों बढ़ा ?
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने अपने तेल आयात में बड़ा बदलाव किया। यूरोपीय और अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते रूस ने एशियाई देशों को रियायती दरों पर तेल बेचना शुरू किया। भारत ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए रूस से तेल आयात कई गुना बढ़ा दिया। मई 2025 में भारत रूस से प्रतिदिन लगभग 1.96 मिलियन बैरल तेल खरीद रहा था। पहले यह हिस्सा भारत के कुल कच्चे तेल आयात का सिर्फ 1 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर करीब 40-44 प्रतिशत हो गया है।
भारत पर क्या हो सकता है असर ?
अगर अमेरिका भारत पर 500 प्रतिशत का टैरिफ लागू करता है, तो इसका सीधा असर भारतीय उत्पादों के अमेरिकी बाजार में निर्यात पर पड़ेगा। भारत के टेक्सटाइल, आईटी प्रोडक्ट्स, जूते-चप्पल, ऑटो पार्ट्स और अन्य सेक्टर पर बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा है और रूस से सस्ते तेल की खरीद उसकी जरूरत है।
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आगे क्या होगा ?
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है और भारत अमेरिकी कांग्रेस में पेश होने वाले बिल की दिशा पर करीबी नज़र बनाए हुए है। जयशंकर के बयान से संकेत मिलता है कि भारत अमेरिका के साथ तनाव नहीं चाहता, लेकिन वह अपने राष्ट्रीय हितों से पीछे भी नहीं हटेगा।

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