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मोदी-ट्रंप की बातचीत से हिला बाज़ार; ट्रेड डील पर मुहर
By EditorialPublished on
भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक नया मोड़ आने वाला है। दोनों देशों के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता जल्द ही होने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच लगातार बातचीत चल रही है, ताकि इस डील को अंतिम रूप दिया जा सके। माना जा रहा है कि आने वाले 48 घंटों में इस पर बड़ी घोषणा हो सकती है।

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भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रही व्यापारिक डील को लेकर अब बड़ा फैसला होने की उम्मीद है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज़ हो गई है और अगले 48 घंटों में इस डील पर मुहर लग सकती है।
सूत्रों के अनुसार, इस वक्त भारत की व्यापारिक टीम वॉशिंगटन डीसी में मौजूद है। टीम का भारत लौटने का कार्यक्रम था, लेकिन ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए उन्होंने अपना प्रवास कुछ दिनों के लिए बढ़ा दिया है। दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच लगातार बातचीत हो रही है ताकि इस डील को तय समय से पहले पूरा किया जा सके।
9 जुलाई तक फाइनल करनी थी डील, हो सकती है उससे पहले घोषणा :
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और अमेरिका ने इस डील को 9 जुलाई तक फाइनल करने की समय सीमा तय की थी। लेकिन अब कहा जा रहा है कि अगले 48 घंटों में ही एक छोटा व्यापार समझौता किया जा सकता है। अमेरिका की ओर से इस दौरान टैरिफ (शुल्क दरों) को लेकर भी अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
हालांकि बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है। विशेष रूप से अमेरिका की मांग है कि भारत जेनिटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के लिए अपने बाज़ार के दरवाजे खोले, जबकि भारत इस पर सतर्क रवैया अपनाए हुए है।
क्या-क्या हैं दोनों देशों की मांगें ?
अमेरिका चाहता है कि भारत डेयरी सेक्टर और कृषि बाजार में अमेरिकी कंपनियों को ज्यादा पहुंच दे। भारत की तरफ से मांग की जा रही है कि अमेरिका जूते, कपड़े और चमड़े जैसे उत्पादों पर टैरिफ में छूट दे ताकि भारत से इन उत्पादों का निर्यात बढ़ सके। फिलहाल दोनों देश अपने-अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं और इन्हीं मुद्दों पर चर्चा चल रही है।
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टैरिफ विवाद बना सबसे बड़ी रुकावट :
ट्रेड डील में सबसे बड़ी अड़चन टैरिफ को लेकर बनी हुई है। भारत का कहना है कि जब तक टैरिफ से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक किसी बड़े व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर करना संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हाई-इम्प्लॉयमेंट गुड्स (जैसे कपड़े, जूते आदि) पर टैरिफ कटौती नहीं होती, तो भारत और अमेरिका के बीच 2030 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापार का लक्ष्य पूरा करना काफी मुश्किल हो जाएगा।
क्या होगी अगली घोषणा ?
अब सभी की निगाहें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक व्यापारिक समझौते की घोषणा हो सकती है, जो भविष्य में एक व्यापक ट्रेड डील का रास्ता खोल सकती है।

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