ट्रंप के दबाव में एलन मस्क की नागरिकता खतरे में; जानिए पूरा मामला
कभी एक-दूसरे के सहयोगी रहे डोनाल्ड ट्रंप और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के बीच अब तल्खी खुलकर सामने आ गई है। जहां कुछ समय पहले तक मस्क ट्रंप के चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर आते थे, वहीं अब दोनों के बीच तीखी बयानबाजी हो रही है। ताजा मामले में ट्रंप ने एलन मस्क को अमेरिका से डिपोर्ट करने की धमकी दी है, जिसने अमेरिकी राजनीति और कानूनी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
क्या वाकई किसी अमेरिकी नागरिक को डिपोर्ट किया जा सकता है?
अमेरिकी संविधान के तहत नागरिकता के दो प्रमुख आधार हैं:
  • जन्म आधारित नागरिकता – यदि कोई व्यक्ति अमेरिका में जन्मा है तो उसकी नागरिकता को समाप्त नहीं किया जा सकता।
  • नेचुरलाइज्ड नागरिकता – यदि किसी विदेशी नागरिक ने कानूनी प्रक्रिया के तहत अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की है, तो कुछ विशेष परिस्थितियों में उसकी नागरिकता खत्म की जा सकती है।
लेकिन किसी की नेचुरलाइज्ड नागरिकता खत्म करने के लिए सरकार को यह साबित करना होता है कि नागरिकता लेते समय व्यक्ति ने धोखाधड़ी की थी, फर्जी दस्तावेज़ दिए थे या फिर जरूरी जानकारी छुपाई थी।
एलन मस्क का नागरिकता सफर :
एलन मस्क का जन्म दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में हुआ था। बाद में वे कनाडा चले गए और वहां से 1992 में स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका आए। शुरुआत में उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू की, लेकिन जल्दी ही उन्होंने पढ़ाई छोड़कर अपनी पहली कंपनी Zip2 शुरू कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्क ने 1997 में H-1B वीजा प्राप्त किया और 2002 में अमेरिका की नेचुरलाइजेशन प्रक्रिया के तहत अमेरिकी नागरिक बन गए।
कहां से शुरू हुआ विवाद ?
मस्क पर आरोप है कि उन्होंने 1992 में अमेरिका में रहते हुए स्टूडेंट वीजा की शर्तों का उल्लंघन किया और बाद में नागरिकता लेते समय कुछ जानकारियां छुपाईं। ट्रंप समर्थक इस आधार पर उनकी नागरिकता रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
क्या सच में मस्क को डिपोर्ट किया जा सकता है ?
अगर ट्रंप प्रशासन या भविष्य की कोई सरकार यह साबित कर देती है कि एलन मस्क ने नागरिकता के लिए गलत जानकारी दी थी या कानून का उल्लंघन किया था, तो उनकी अमेरिकी नागरिकता रद्द की जा सकती है। ऐसी स्थिति में मस्क कनाडा के नागरिक माने जाएंगे और अमेरिका से उन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है। हालांकि, नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया बेहद जटिल और लंबी होती है, और इसमें अदालतों का अंतिम फैसला सर्वोच्च होता है।
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अब आगे क्या ?
फिलहाल यह पूरा मामला राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित है। ट्रंप के बयान ने जरूर बहस को जन्म दिया है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया शुरू होने की अभी कोई औपचारिक जानकारी नहीं है। मस्क और ट्रंप दोनों ही अपनी-अपनी राजनीतिक और कारोबारी रणनीतियों में व्यस्त हैं, ऐसे में यह विवाद आगे और कितना बढ़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
Editorial

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