✕
संसद में गूंजा POTA; आतंकियों के लिए काल या राजनीति का हथियार?
By EditorialPublished on
संसद के मानसून सत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने पोटा (POTA) कानून का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कानून आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रतीक था और इसे हटाकर कांग्रेस ने देश की सुरक्षा से समझौता किया। आइए जानते हैं, आखिर क्या है यह पोटा कानून, जिस पर संसद में इतनी गरमी छाई रही।
_202507291641218512.jpg)
x
_202507291641218512.jpg)
संसद के मानसून सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोलते हुए पोटा कानून (POTA Act 2002) का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने 2002 में यह सख्त कानून लाया था, जिसका उद्देश्य देश में बढ़ते आतंकवाद पर नकेल कसना था। शाह ने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने 2004 में सत्ता में आने के बाद यह कानून आखिर किसके हित में हटाया।
क्या था POTA एक्ट 2002 ?
पोटा का पूरा नाम है Prevention of Terrorism Act, 2002। यह कानून 1999 में भारतीय विमान IC-814 के अपहरण और 2001 संसद हमले जैसी घटनाओं के बाद बनाया गया था। उस समय आतंकवाद से निपटने के लिए सरकार को सख्त और प्रभावी कानून की आवश्यकता महसूस हुई। इस एक्ट के तहत जांच एजेंसियों को कई विशेष अधिकार दिए गए:
- संदिग्धों को 180 दिन तक हिरासत में रखने का अधिकार
- आतंकी संगठनों से संबंध होने के शक में गिरफ्तारी
- आतंकवाद के लिए धन जुटाने को भी अपराध मानना
- फोन टैपिंग, संपत्ति जब्ती और गवाहों की पहचान गोपनीय रखने का अधिकार
- यह कानून आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने और उनके खिलाफ तेज़ कार्रवाई करने के लिए लाया गया था।
क्यों हुआ विवाद और रद्द ?
अपने समय में POTA Act 2002 कई बड़े आतंकी मामलों में बेहद प्रभावी साबित हुआ, लेकिन जल्द ही इस पर दुरुपयोग के आरोप लगने लगे। मानवाधिकार संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि इस कानून का इस्तेमाल निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए किया गया। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक हथियार के तौर पर उपयोग किए जाने का भी आरोप लगाया।
इन विवादों के कारण, 2004 में यूपीए सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस कानून को रद्द कर दिया। कांग्रेस का तर्क था कि मौजूदा कानूनों से भी आतंकवाद से निपटा जा सकता है और पोटा की कठोर धाराओं का दुरुपयोग रोकना ज़रूरी है।
अमित शाह का हमला :
अमित शाह ने लोकसभा में कहा, “2002 में जब पोटा लाया गया था, तब कांग्रेस ने इसका विरोध किया था और सत्ता में आते ही इसे रद्द कर दिया। सवाल यह है कि यह फैसला किसके फायदे के लिए लिया गया?” उन्होंने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च है और आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानूनों की आवश्यकता हमेशा रहेगी।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
आज भी क्यों चर्चा में है पोटा ?
हाल के दिनों में बढ़ते आतंकवादी खतरों के बीच POTA Act 2002 को फिर से चर्चा में लाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सख्त कानूनों के अभाव में सुरक्षा एजेंसियों के पास सीमित विकल्प रह जाते हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसे कानूनों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद ज़रूरी है ताकि निर्दोष लोगों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।
POTA Act 2002 एक ऐसा कानून था जिसने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को नए सिरे से परिभाषित किया, लेकिन उसके दुरुपयोग के आरोपों ने इसे विवादों में घेर लिया। संसद में अमित शाह के बयान के बाद पोटा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।
Next Story
Related News
X

