अगस्त में गोल्ड रेट में हलचल, एक्सपर्ट्स ने दी जानकारी
पिछले हफ्ते सोने की कीमतों में एक बार फिर दबाव देखा गया। न्यूयॉर्क के कॉमेक्स (COMEX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 37.90 डॉलर (1.12%) गिरकर 3,335.60 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल गोल्ड प्राइस में तेजी या गिरावट का रुख कई अहम कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें अमेरिका और चीन के बीच चल रही ट्रेड वार्ता, टैरिफ डेडलाइन और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की मौद्रिक नीति शामिल हैं।
गिरावट के कारण क्या हैं ?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वेंचुरा कमोडिटी एवं सीआरएम हेड एन एस रामास्वामी ने बताया कि टैरिफ डेडलाइन बढ़ाने को लेकर अमेरिका और चीन की बातचीत के बीच सोने की कीमत में भारी गिरावट आई है। पिछले हफ्ते सोना 3,438 डॉलर से गिरकर 3,335.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिलहाल कमजोर है, क्योंकि निवेशक टैरिफ और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सौदों को लेकर अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं।
अमेरिका-चीन वार्ता से उम्मीदें :
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और चीन के बीच स्टॉकहोम में दूसरे दौर की वार्ता शुरू हो चुकी है। दोनों देशों का उद्देश्य है लंबे समय से चल रहे आर्थिक विवादों को सुलझाना और बढ़ते ट्रेड वॉर से बचने के लिए कदम पीछे खींचना। यदि बातचीत सफल रहती है, तो दोनों देश टैरिफ समझौते को 90 दिनों तक बढ़ाने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे सोने की कीमत में स्थिरता आ सकती है।
अगस्त में सोने का रुख कैसा रहेगा ?
एन एस रामास्वामी का मानना है कि 1 अगस्त की डेडलाइन से पहले यदि टैरिफ को लेकर कोई सकारात्मक खबर नहीं आती, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नरम मौद्रिक नीति और चीन के सेंट्रल बैंक द्वारा सोने की खरीदारी फिर से शुरू होने की संभावना 2025 के अंत तक कीमतों को सहारा दे सकती है।
निकट भविष्य में न तो बड़ी गिरावट और न ही तेज उछाल की उम्मीद है, लेकिन यदि व्यापार वार्ता में सकारात्मक प्रगति होती है, तो निवेशक फिर से सोने की ओर रुख कर सकते हैं।
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निवेशकों के लिए संकेत :
बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने की सलाह दे रहे हैं। सोने में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना कम है, लेकिन टैरिफ और ट्रेड डील्स पर आने वाले अपडेट कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि अमेरिका और चीन के बीच कोई समझौता होता है, तो गोल्ड प्राइस में तेजी की संभावना बढ़ सकती है, जबकि वार्ता असफल रही तो सोने पर दबाव बना रह सकता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण :
विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के अंत तक चीन के सेंट्रल बैंक की ओर से सोने की खरीदारी बढ़ने और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार होने पर गोल्ड प्राइस में स्थिर उछाल आ सकता है। अगस्त 2025 में सोने की कीमतों पर बाजार की नजरें टैरिफ तनाव, अमेरिकी फेड की नीति और अमेरिका-चीन वार्ता के नतीजों पर टिकी रहेंगी। निवेशकों को सतर्क रहते हुए बाजार की हर नई खबर पर ध्यान देना होगा।
Editorial

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