कोर्ट का बड़ा फैसला: महादेवी हथिनी अब गुजरात में
कोल्हापुर के शिरोल तालुका के नंदनी गांव में भावनाओं का ज्वार उस समय उमड़ पड़ा जब मशहूर “महादेवी” हथिनी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुजरात के जामनगर स्थित ‘वंतारा हाथी संरक्षण केंद्र’ भेजा गया। नंदनी के स्वस्तिश्री जिनशेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में वर्षों से रह रही महादेवी को वहां की धार्मिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा माना जाता था। ग्रामीणों के अनुसार, वह केवल एक हथिनी नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक और जैन धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने वाली परिवार का हिस्सा बन चुकी थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि :
महादेवी के ट्रांसफर को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महादेवी को गुजरात के राधे कृष्ण एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था, जो ‘वंतारा’ पहल के तहत हाथियों की देखभाल के लिए प्रसिद्ध है। मठ ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट में पेश रिपोर्ट में बताया गया कि महादेवी गंभीर चोटों से पीड़ित है और उसे बेहतर चिकित्सा और देखभाल की आवश्यकता है, जो गुजरात के केंद्र में उपलब्ध है।
विदाई के समय ग्रामीणों की भावनाएं उमड़ीं :
कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग और ‘वंतारा’ टीम नंदनी पहुंची और हथिनी को कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की। ग्रामीणों ने मठ परिसर में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ महादेवी को विदाई दी। गांव के निवासियों ने कहा, “हम कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन महादेवी हमारे जीवन का हिस्सा रही है, उसे खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं कर सकते।”
तनावपूर्ण माहौल, पुलिस ने संभाला हालात :
हालांकि, हथिनी को रवाना करने की प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं रही। रात करीब 11:30 बजे महादेवी की शोभायात्रा के दौरान कुछ युवकों ने दो पुलिस वाहनों पर पथराव कर दिया और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया, जिसमें कुछ लोग मामूली रूप से घायल हुए। इसके बावजूद रात 12:30 बजे भारी पुलिस सुरक्षा में महादेवी को पशु एम्बुलेंस में बैठाकर गुजरात के लिए रवाना किया गया।
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धार्मिक संस्कृति में गहरी पैठ :
नंदनी मठ के लोगों के लिए महादेवी सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि विश्वास का प्रतीक थी। कई जैन धार्मिक आयोजनों में उसकी उपस्थिति अनिवार्य हो गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उसकी विदाई से मठ की परंपराओं में एक खालीपन आ गया है, जिसे भरना आसान नहीं होगा।
गुजरात में नई शुरुआत :
जामनगर स्थित वंतारा हाथी संरक्षण केंद्र अपने बेहतरीन इलाज और आधुनिक सुविधाओं के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महादेवी की सेहत में सुधार के लिए यह वातावरण बेहतर साबित होगा। ग्रामीणों के आंसुओं और भावुक विदाई के बीच महादेवी का यह सफर न केवल कोल्हापुर बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि गुजरात के नए माहौल में महादेवी कितनी जल्दी स्वस्थ होकर अपने जीवन का नया अध्याय शुरू कर पाती है।
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