हाल ही में रिलीज़ हुई 'सैयारा' फिल्म का क्रेज़ लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। थिएटरों में युवाओं की भावनात्मक प्रतिक्रिया के वीडियो पहले ही सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं – कोई रोता नजर आ रहा है, तो कोई सीट पर गिरकर चीखता दिख रहा है। पर अब यह जुनून थिएटर की दीवारों से निकलकर सड़कों पर पहुंच गया है, और इसकी वजह से कई बार समाज में अनुशासन और मर्यादा को भी खतरा पैदा हो रहा है।


वायरल हुआ सड़क पर फिल्मी ड्रामा का वीडियो

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक पीले रंग की शर्ट पहने हुए सड़क पर सैयारा फिल्म के गाने पर रील बनाता दिख रहा है। अब रील बनाना कोई नई बात नहीं, लेकिन जिस अंदाज़ में और जिस जगह यह रील बनाई जा रही है, उसने लोगों को हैरानी में डाल दिया है।

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कॉलेज की कुछ युवतियां साइकिल से लौट रही थीं, तभी अचानक यह युवक उनके सामने आकर अपनी शर्ट फाड़ता है और घुटनों पर बै� कर फिल्मी स्टाइल में डायलॉग और गाना प्ले कर देता है। युवक पूरी तरह सैयारा फिल्म के भाव में खोया हुआ नजर आता है, लेकिन उसका यह 'ड्रामा' वहां मौजूद लड़कियों के लिए गंभीर असहजता का कारण बन जाता है।


युवती ने छुपाया चेहरा, युवक करता रहा अभिनय

इस हरकत के दौरान एक युवती शर्म से घबरा जाती है, और तुरंत अपना चेहरा छुपाने की कोशिश करती है। वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वहां मौजूद अन्य लोग – चाहे वो राहगीर हों या दुकानदार – सिर्फ तमाशबीन बनकर खड़े रहते हैं। ना किसी ने युवक को टोका, ना ही उसे रोका।

वीडियो वायरल होने के बाद लोग सवाल पूछ रहे हैं – "क्या रील के नाम पर अब कोई भी कहीं भी कुछ भी कर सकता है?"






सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग इस हरकत को ‘फिल्मी पागलपन का सामाजिक पतन’ बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा – "रील बनाना क्रिएटिविटी है, लेकिन किसी को शर्मिंदा करना या असहज करना घटिया मानसिकता है।"


वहीं, कई लोग सवाल उ� ा रहे हैं कि "ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं होती?" और "क्या महिलाओं की सुरक्षा अब रील बनाने वालों की मनमानी के नीचे दब गई है?"


'सैयारा' का क्रेज़ या मानसिक नियंत्रण का नुकसान?

फिल्म ‘सैयारा’ को लेकर लोगों में जो दीवानगी देखी जा रही है, वह अब एक सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है। पहले थिएटरों में भावनात्मक विस्फोट, फिर सेल्फी और सीट तोड़ने की घटनाएं, और अब सड़क पर शर्ट फाड़ते हुए रील बनाकर युवतियों को असहज करना – क्या ये फिल्मी जुनून की सीमा नहीं लांघ रहा?

Editorial

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