बौखलाहट से नरमी तक… TRF पर पाकिस्तान का यू-टर्न
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन The Resistance Front (TRF) ने ली थी, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का छद्म चेहरा माना जाता है। हाल ही में अमेरिका ने TRF को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया, जिसके बाद पाकिस्तान का रुख अचानक बदल गया। विदेश मंत्री इशाक डार ने साफ कहा कि उन्हें TRF पर अमेरिकी कार्रवाई से कोई आपत्ति नहीं है और इस संगठन का पाकिस्तान या लश्कर-ए-तैयबा से कोई संबंध नहीं है। सवाल ये है कि आखिर TRF पाकिस्तान के लिए बोझ क्यों बन गया? आइए जानते हैं इसके पीछे के 5 बड़े कारण।
1. भारत की एयरस्ट्राइक का डर :
पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के भीतर आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर TRF को बड़ा झटका दिया। पाकिस्तान सरकार ने दावा किया कि भारत ने उनके नागरिकों पर हमला किया, लेकिन सच्चाई यह है कि भारतीय सेना ने केवल आतंकियों को निशाना बनाया। उरी (2016) और पुलवामा (2019) हमलों के बाद भारत की जवाबी कार्रवाइयों का इतिहास देखते हुए पाकिस्तान को डर है कि TRF के समर्थन का कोई भी संकेत उसे फिर से भारतीय एयरस्ट्राइक का सामना करा सकता है।
2. अमेरिकी दबाव और ट्रंप के टैरिफ का खतरा :
अमेरिका ने TRF को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। ऐसे में पाकिस्तान अब अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहता। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कई देशों पर टैरिफ लगा चुके हैं, और पाकिस्तान को डर है कि आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों के चलते उस पर भी आर्थिक कार्रवाई हो सकती है।
3. अमेरिकी सैन्य मदद और डिफेंस डील्स पर खतरा :
पाकिस्तान अमेरिका से उन्नत सैन्य उपकरण खरीदने की प्रक्रिया में है। अगर TRF से संबंध साबित होते हैं, तो ये डील्स ठप हो सकती हैं। इसलिए पाकिस्तान अब TRF से दूरी बनाकर यह संदेश देना चाहता है कि वह आतंकवाद को किसी भी तरह से प्रोत्साहित नहीं करता।
4. FATF की ग्रे लिस्ट में लौटने का डर :
पाकिस्तान हाल ही में FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आया है, लेकिन यह स्थिति नाजुक है। TRF जैसे संगठनों के साथ किसी भी तरह का ताल्लुक़ इस्लामाबाद को फिर से निगरानी सूची में डाल सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और आर्थिक मदद पर बुरा असर पड़ेगा।
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5. अमेरिका से कर्ज और निवेश की जरूरत :
आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को IMF, वर्ल्ड बैंक और अमेरिका से निवेश और कर्ज की सख्त जरूरत है। TRF जैसे आतंकी संगठनों का बचाव करने से अमेरिका का भरोसा उठ सकता है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार से मुलाकात में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की सराहना की थी। यह समर्थन तभी जारी रहेगा जब पाकिस्तान अपने रुख में सख्ती दिखाएगा। TRF पाकिस्तान के लिए अब बोझ बन चुका है। पहलगाम हमले और अमेरिकी कार्रवाई के बाद इस्लामाबाद के पास संगठन से दूरी बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
Editorial

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