✕
फ्रॉड लोन केस में अनिल अंबानी पर शिकंजा; ED ने दबोचे सबूत
By EditorialPublished on
बैंक लोन फ्रॉड केस में ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गुरुवार से शुरू हुई छापेमारी का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। जांच एजेंसी ने मुंबई में करीब 35 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज और डिवाइस जब्त किए हैं।

x
बैंक लोन फ्रॉड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा रिलायंस समूह की कंपनियों पर कसता जा रहा है। अनिल अंबानी ईडी छापेमारी लगातार तीसरे दिन शनिवार को भी जारी रही। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत शुरू हुई इस कार्रवाई में एजेंसी ने मुंबई में करीब 35 से अधिक परिसरों पर छापेमारी की और बड़ी संख्या में दस्तावेज़ और कंप्यूटर डिवाइस जब्त किए।
3,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फर्जीवाड़े से जुड़ा मामला :
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ईडी ने 24 जुलाई से इस मामले में कार्रवाई शुरू की। जांच में सामने आया है कि 2017 से 2019 के बीच यस बैंक से लगभग 3,000 करोड़ रुपये के लोन का गलत इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि ऋण स्वीकृतियों के दौरान बैंक की नीतियों का उल्लंघन करते हुए पिछली तारीख के दस्तावेजों और बिना उचित जांच के निवेश किए गए।
सूत्रों का कहना है कि लोन दिए जाने से पहले प्रवर्तकों को उनके संस्थानों के माध्यम से धनराशि दी गई, जो रिश्वत के लेन-देन की ओर संकेत करती है। एजेंसी इस मामले में ‘‘रिश्वत’’ और लोन के दुरुपयोग के आरोपों की गहन जांच कर रही है।
किन परिसरों पर हुई छापेमारी ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये छापेमारी 50 कंपनियों और 25 से ज्यादा व्यक्तियों से जुड़े परिसरों पर की गई। इनमें अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के कई शीर्ष अधिकारी भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े लगभग 10,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण कोष के दुरुपयोग का मामला भी ईडी की जांच के दायरे में है।
कंपनियों का पक्ष :
रिलायंस समूह की दो कंपनियों—रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर—ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि ईडी की कार्रवाई का उनके बिजनेस ऑपरेशन, वित्तीय प्रदर्शन, शेयरधारकों या कर्मचारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनियों ने स्पष्ट किया कि मीडिया में चल रही खबरें संभवतः 10 साल पुराने रिलायंस कम्युनिकेशन्स लिमिटेड (RCOM) या रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) से संबंधित लेन-देन पर आधारित हैं।
कंपनियों ने आगे कहा कि अनिल अंबानी न तो ‘रिलायंस पावर’ और न ही ‘रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर’ के बोर्ड में हैं और उनका ‘रिलायंस कम्युनिकेशन्स’ या ‘रिलायंस होम फाइनेंस’ से कोई व्यावसायिक या वित्तीय संबंध नहीं है।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
सेबी की रिपोर्ट पर भी नजर :
एजेंसी की जांच में यह भी सामने आया है कि सेबी की एक रिपोर्ट ने इस कार्रवाई को मजबूत आधार दिया। रिपोर्ट के अनुसार, RHFL द्वारा दिए गए कॉर्पोरेट ऋण 2017-18 में 3,742.60 करोड़ रुपये से बढ़कर 2018-19 में 8,670.80 करोड़ रुपये तक पहुंच गए थे। ईडी इन लेन-देन के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
अनिल अंबानी ईडी छापेमारी ने एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर में कर्ज से जुड़े अनियमितताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एजेंसी ने साफ किया है कि जांच पूरी होने तक और भी परिसरों पर कार्रवाई हो सकती है। इस मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।

Editorial
Next Story
Related News
X
