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आत्मिक जागृति, करुणा, सहयोग और समर्पण की दिशा में उठाया गया कदम है सर्वोदय
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जैन धर्म का मूल स्वर सर्वोदय है अर्थात् सबका उदय, सबका कल्याण। यह विचार श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि मसा ने पनवेल स्थित जैन स्थानक में आनंद ऋषि महाराज की 125वीं जन्म जयंती महोत्सव के आठवें दिन धर्मसभा को संबोधित करते व्यक्त किए।
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मुंबई। जैन धर्म का मूल स्वर सर्वोदय है अर्थात् सबका उदय, सबका कल्याण। यह विचार श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि मसा ने पनवेल स्थित जैन स्थानक में आनंद ऋषि महाराज की 125वीं जन्म जयंती महोत्सव के आठवें दिन धर्मसभा को संबोधित करते व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सर्वोदय का अर्थ केवल भौतिक उन्नति नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति, करुणा, सहयोग और समर्पण की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने आचार्य आनंद ऋषि के जीवन को सर्वोदय का सजीव उदाहरण बताया और कहा कि आचार्यश्री ने समग्र जैन संघ और सम्पूर्ण मानव समाज के लिए तप, त्याग और सेवा का अविरल कार्य किया। उन्होंने कहा कि सर्वोदय का मार्ग अहिंसा, अपरिग्रह और समता पर आधारित है, जो दिखने में कठिन अवश्य है, किंतु वही मार्ग है जो आत्मा को परम पद तक पहुंचाता है और समाज में समरसता, करुणा और सहयोग का वातावरण निर्मित करता है। संचालन रणजीत कांकरेचा ने किया। चातुर्मास समिति अध्यक्ष राजेश बांठिया ने बताया कि शुक्रवार को आनंद ऋषि मसा की 125वीं जन्म जयंती पर पनवेल जैन समाज आयंबिल तप करेगा। यह जानकारी प्रवक्ता सुनिल चपलोत ने दी।

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