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राजस्थान के झालावाड़ स्कूल छत गिरने से चार बच्चों की मौत
By EditorialPublished on
शुक्रवार सुबह राजस्थान के मनोहरथाना इलाके के पिपलोदी गांव में बड़ा हादसा हुआ। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की पुरानी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में चार मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य छात्र घायल हो गए और मलबे में फंसे बताए जा रहे हैं। मौके पर बचाव कार्य जारी है, गांव में मातम का माहौल है।

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राजस्थान के झालावाड़ ज़िले में शुक्रवार (25 जुलाई) की सुबह दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। मनोहरथाना ब्लॉक के पिपलोदी गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की जर्जर छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के तुरंत बाद विद्यालय की दीवार भी ढह गई, जिससे वहां मौजूद बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। इस दर्दनाक घटना में अब तक 4 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य बच्चे मलबे में दबे होने की आशंका है। हादसे के समय स्कूल में करीब 60 से अधिक बच्चे मौजूद थे, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है।
अफरा-तफरी का माहौल और युद्ध स्तर पर बचाव कार्य :
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, वहीं घायल बच्चों को तत्काल मनोहरथाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CSC) में भर्ती कराया गया। मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीण भी प्रशासन की मदद में जुटे हुए हैं। स्कूल परिसर में चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल है, परिजनों की चीख-पुकार से वातावरण गूंज रहा है।
झालावाड़ के एसपी अमित कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में 3 से 4 छात्रों की मौत हुई है और कई बच्चे घायल हैं। सूचना मिलते ही झालावाड़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया मौके के लिए रवाना हो गए हैं। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भी हादसे में तीन बच्चों की मौत की पुष्टि की और कहा कि घायल बच्चों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कलेक्टर से फोन पर बात कर राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
हादसे का कारण: जर्जर भवन और लगातार बारिश :
स्थानीय लोगों के अनुसार स्कूल भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में था। कई बार मरम्मत की मांग की गई, लेकिन समय पर कार्यवाही न होने के कारण यह हादसा हुआ। भारी बारिश के चलते दीवारों में नमी आने से इमारत और कमजोर हो गई थी। अचानक छत गिरने से बच्चे संभल भी नहीं पाए और मलबे में दब गए।
ग्रामीणों में आक्रोश, राज्य सरकार पर सवाल :
हादसे के बाद गांव में मातम का माहौल है। स्थानीय लोग प्रशासन और शिक्षा विभाग पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते अगर स्कूल भवन की मरम्मत कर दी जाती तो मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।
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राज्यभर में शोक की लहर :
हादसे की खबर फैलते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने लिखा, “झालावाड़ के मनोहरथाना में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से कई बच्चों एवं शिक्षकों के हताहत होने की सूचना मिल रही है। मैं ईश्वर से कम से कम जनहानि एवं घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ देने की प्रार्थना करता हूं।”
फिलहाल बचाव कार्य जारी है और मलबे में दबे बच्चों को निकालने की कोशिशें जारी हैं। हादसे की भयावहता को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं, जबकि घायल बच्चों के परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।
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