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मुंबई ट्रेन ब्लास्ट पर SC स्टे; ओवैसी का विवादित बयान
By EditorialPublished on
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में हाई कोर्ट के बरी करने के फैसले पर रोक लगाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर मालेगांव विस्फोट मामले में भी अदालत आरोपी बरी कर देती है तो क्या सरकार उसके खिलाफ अपील दायर करेगी?

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाई कोर्ट के बरी करने के आदेश पर रोक लगाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि आतंकवाद का खात्मा जरूरी है, लेकिन अगर सरकार धर्म देखकर अपील करेगी तो यह न्याय की लड़ाई कमजोर हो जाएगी।
सरकार की अपील पर उठाए सवाल :
ओवैसी ने कहा, “कोर्ट ने स्टे लगाया है कि जो आरोपी 18 साल बाद जेल से बाहर आए हैं, उन्हें दोबारा गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। मैं केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से पूछना चाहता हूं कि आप ये अपील क्यों कर रहे हैं, जब हाई कोर्ट ने उन्हें लीगली इनोसेंट करार दिया है।” उन्होंने यह भी पूछा कि अगर मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी बरी होते हैं, तो क्या सरकार उसके खिलाफ भी अपील करेगी?
मक्का मस्जिद और अजमेर विस्फोट का जिक्र :
ओवैसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने 2008 के मक्का मस्जिद ब्लास्ट और अजमेर विस्फोट मामले में अपील नहीं की। “2008 में मक्का मस्जिद में धमाके में 9 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन वहां अपील नहीं की गई। अजमेर विस्फोट मामले में भी अपील नहीं हुई। फिर मुंबई ब्लास्ट केस में इतनी जल्दबाजी क्यों?”
सोशल मीडिया पर बयान :
ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा: “सुप्रीम कोर्ट ने 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में बरी किए गए आरोपियों पर हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई। सरकार ने जल्दबाजी में अपील की, लेकिन मक्का मस्जिद और अजमेर ब्लास्ट में नहीं की। अगर मालेगांव केस में भी आरोपी बरी हो जाएं तो क्या अपील होगी? यही असली पैमाना है।”
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SC का फैसला और आगे की कार्यवाही :
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में सभी 12 आरोपियों को बरी करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई। महाराष्ट्र सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जेल से बाहर आ चुके आरोपियों को फिलहाल दोबारा गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर आगे की सुनवाई के लिए बुलाया है।
ओवैसी के बयान ने 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस पर सरकार के रुख को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि हाई कोर्ट का बरी करने का फैसला बरकरार रहेगा या नहीं।

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