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बाजार में करेक्शन शॉक; इंडिया-UK डील से पहले भारी गिरावट
By EditorialPublished on
इंडिया-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन होने से ठीक पहले भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखी गई। बीएसई सेंसेक्स के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 5 को छोड़ बाकी सभी में बिकवाली हावी रही। निवेशकों में सतर्कता बढ़ने से बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।

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भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर से पहले भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार बिकवाली देखी गई। निवेशकों में सतर्कता और वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बीच बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
सुबह से ही गिरावट का दौर :
सुबह 9:45 बजे तक सेंसेक्स 146 अंक टूटकर 82,580 पर था, जबकि निफ्टी 26 अंक गिरकर 25,193 पर ट्रेड कर रहा था। दोपहर 12 बजे के करीब सेंसेक्स 526.06 अंक या 0.63% गिरकर 82,200.58 पर और निफ्टी 150.80 अंक या 0.60% गिरकर 25,069.10 पर आ गया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.3% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.1% की गिरावट रही।
कौन से शेयर रहे दबाव में ?
बीएसई सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में रहे। सबसे ज्यादा गिरावट ट्रेंट में आई, जो 3% से ज्यादा लुढ़का। कोटक महिंद्रा बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, टीसीएस, इंफोसिस और एक्सिस बैंक भी सबसे ज्यादा प्रभावित शेयरों में रहे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के पीछे वजह :
आईटी शेयरों में दबाव: इंफोसिस के तिमाही नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 8.7% बढ़कर ₹6,921 करोड़ रहा, लेकिन तिमाही दर तिमाही 1.5% की गिरावट दर्ज की गई। कमजोर ग्लोबल संकेत: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फेडरल रिजर्व दौरे से पहले वैश्विक शेयर बाजारों में उथल-पुथल रही। अमेरिका-यूरोपीय संघ के बीच 30% टैरिफ विवाद से भी निवेशक चिंतित हैं।
FIIs की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को ₹4,209.11 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जिससे लार्ज कैप शेयरों पर दबाव बढ़ा।
इन शेयरों पर नजर :
इंफोसिस, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, IEX, कोफोर्ज और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के आज के जून तिमाही के नतीजों पर निवेशकों की नजर रही।
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निवेशकों में सतर्कता :
इंडिया-यूके FTA को लेकर उत्सुकता के बावजूद निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में दबाव बना रह सकता है।
इंडिया-यूके फ्री ट्रेड डील से पहले भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर भारी दबाव दिखा और निवेशकों के करीब ₹4,000 करोड़ से ज्यादा डूब गए। बाजार की दिशा अब वैश्विक संकेतों और तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी।

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