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SC में गूंजा असम बुलडोजर एक्शन; CJI गवई की टिप्पणी
By EditorialPublished on
असम में बुलडोजर एक्शन के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि करीब 667 गरीब परिवार पिछले 60-70 साल से उस जमीन पर रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी का बहाव बदलता रहता है, जिससे लोग बार-बार ऊंचाई वाले इलाकों में जाकर बसने को मजबूर होते हैं।

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असम के गोवालपाड़ा जिले में राज्य सरकार के बुलडोजर अभियान के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए असम सरकार, मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश CJI गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने साफ कहा कि अदालत याचिका पर सुनवाई करेगी, लेकिन अगर जमीन सरकारी पाई गई तो कोर्ट का आदेश लागू नहीं होगा।
CJI गवई ने क्या कहा ?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कहा कि 667 गरीब परिवार पिछले 60-70 साल से इस जमीन पर रह रहे हैं और ब्रह्मपुत्र नदी के बहाव में बदलाव के कारण बार-बार ऊंचाई वाले स्थानों पर बसने को मजबूर हुए हैं। इस पर CJI गवई ने दो टूक कहा, “हम नोटिस जारी करना चाहते हैं, लेकिन अगर असम सरकार यह कहे कि यह सरकारी जमीन है, तो हमारा आदेश उस पर लागू नहीं होगा।”
CJI गवई की चेतावनी :
CJI गवई ने याचिकाकर्ताओं को चेताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि उसका आदेश सरकारी भूमि, सड़कों, सार्वजनिक स्थानों, नदियों और जलाशयों पर किसी भी अतिक्रमण पर लागू नहीं होगा। उन्होंने साफ किया कि अदालत अपने पिछले आदेश के विपरीत कोई निर्देश पारित नहीं कर सकती।
याचिका में क्या कहा गया ?
आठ निवासियों द्वारा वकील अदील अहमद के जरिए दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि जून में हुए बेदखली अभियान में 667 से ज्यादा परिवार प्रभावित हुए। याचिका में कहा गया कि अधिकारियों ने बिना व्यक्तिगत सुनवाई और पर्याप्त समय दिए बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण कर दिया। याचिका में यह भी दावा किया गया कि यह कार्रवाई अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाकर की गई, जबकि बहुसंख्यक समुदाय के मामलों में कोई कदम नहीं उठाया गया।
CJI गवई ने पूछा- हाई कोर्ट क्यों नहीं गए ?
सुनवाई के दौरान CJI गवई ने पूछा, “आप हाई कोर्ट क्यों नहीं गए?” हेगड़े ने जवाब दिया कि कई लोग हाई कोर्ट गए थे, लेकिन वहां केवल पुनर्वास पर सुनवाई हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि अतिक्रमणकारियों को भी कानूनी प्रक्रिया का अधिकार है।
13 नवंबर 2024 के आदेश का हवाला :
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के 13 नवंबर 2024 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें बिना कारण बताओ नोटिस और 15 दिन का समय दिए बिना संपत्तियों को गिराने पर रोक लगाई गई थी। CJI गवई ने याद दिलाया कि यह आदेश सार्वजनिक स्थानों और सरकारी जमीनों पर लागू नहीं होता।
स्थिति बनाए रखने की मांग पर CJI गवई का जवाब :
संजय हेगड़े ने सुप्रीम कोर्ट से यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया, जिस पर CJI गवई ने कहा, “अगर यह सरकारी जमीन है, तो हमारा आदेश लागू नहीं होगा। हम अपने फैसले के विपरीत कोई आदेश नहीं दे सकते।”
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अगला कदम :
CJI गवई की बेंच ने असम सरकार को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत अगली सुनवाई में यह तय करेगी कि ध्वस्तीकरण अभियान पर रोक लगाई जाए या नहीं। CJI गवई ने स्पष्ट कर दिया कि अदालत सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को संरक्षण नहीं दे सकती।
असम के बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने मामला और संवेदनशील बना दिया है। CJI गवई की यह चेतावनी साफ संकेत देती है कि यदि जमीन सरकारी पाई गई तो याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं मिलेगी।

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