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उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा; दिल्ली में सियासी भूचाल
By EditorialPublished on
देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। सुबह तक वे राज्यसभा में पूरी तरह सक्रिय थे और शाम होते-होते त्यागपत्र दे दिया। इस फैसले के पीछे क्या कारण हैं, इस पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर पूरे राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें और चिकित्सकीय सलाह को बताया। इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।धनखड़ ने अपने विदाई संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिपरिषद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित पद को छोड़ते समय उन्हें भारत के वैश्विक उत्थान और उपलब्धियों पर गर्व है और देश के उज्ज्वल भविष्य पर पूरा विश्वास है।
विपक्ष में चिंता और सवाल :
धनखड़ के इस्तीफे ने विपक्षी दलों में हलचल मचा दी है। उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस फैसले के पीछे कोई नई चल है इस तरह से कुछ अटकले राजनितिक रणसंग्राम में होते हुए दिखाई दे रही है। इस बारे में विपक्ष दलों में चिंता और कई सवाल उठ रहे है।
- कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके साथ उनका 30-40 साल पुराना गहरा संबंध रहा है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों के बीच मजबूत दोस्ती रही और यह खबर उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुखद लगी
- किरण कुमार चामाला ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि सुबह धनखड़ राज्यसभा में सक्रिय थे और राष्ट्रहित में रचनात्मक संवाद की अपील कर रहे थे, लेकिन शाम होते-होते इस्तीफे की खबर आ गई।
- नीरज डांगी ने स्वास्थ्य कारणों को लेकर सवाल उठाया और कहा कि यह इस्तीफा सरकार के दबाव में लिया गया निर्णय प्रतीत होता है।
- इमरान मसूद ने पूछा कि पूरे दिन संसद में रहने के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि इस्तीफा देना पड़ा।
- अवधेश प्रसाद ने कहा कि यह स्वास्थ्य कारणों से लिया गया चिंताजनक निर्णय है और देश को धनखड़ जैसे संवैधानिक नेताओं की जरूरत है।
- संजय राउत ने इसे “असामान्य” कदम बताया और कहा कि पर्दे के पीछे बहुत कुछ चल रहा है। उन्होंने इशारा किया कि सितंबर में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
- मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह सरकार और उपराष्ट्रपति के बीच का व्यक्तिगत मामला है, जिस पर कांग्रेस की ओर से कोई टिप्पणी नहीं होगी।
- सैयद नासिर हुसैन ने इस फैसले को चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं है।
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राजनीतिक हलचल और अटकलें :
धनखड़ के इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष इसे स्वास्थ्य कारणों से ज्यादा राजनीतिक दबाव का परिणाम बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष ने अब तक कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी गर्म है कि आने वाले महीनों में बड़ा राजनीतिक फेरबदल हो सकता है।

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