हनीट्रैप में फंसे थे 18 विधायक और 4 सांसद, उद्धव सेना का बड़ा दावा
2022 में महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी (MVA) सरकार के पतन को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने अब एक बड़ा दावा किया है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के मंगलवार के संपादकीय में यह आरोप लगाया गया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने के लिए हनीट्रैप और निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था। इसमें कहा गया कि इस साजिश के तहत कम से कम 18 विधायक और 4 सांसद हनीट्रैप में फंसे और ब्लैकमेल होकर बीजेपी के साथ चले गए।


मुंबई, महाराष्ट्र: 2022 में महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी (MVA) सरकार के पतन को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने अब एक बड़ा दावा किया है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के मंगलवार के संपादकीय में यह आरोप लगाया गया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने के लिए "हनीट्रैप" और निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था। इसमें कहा गया कि इस साजिश के तहत कम से कम 18 विधायक और 4 सांसद हनीट्रैप में फंसे और ब्लैकमेल होकर बीजेपी के साथ चले गए।
हनीट्रैप का दावा और पेगासस की एंट्री
सामना के अनुसार, सरकार को गिराने के पीछे एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसमें छिपे हुए कैमरे, पेगासस स्पाइवेयर और इजरायली निगरानी तकनीक का इस्तेमाल हुआ। दावा किया गया कि इजरायल से मंगवाए गए हाईटेक कैमरों और पेगासस जैसे सॉफ्टवेयर के जरिए विधायकों और सांसदों की निजी गतिविधियों पर नज़र रखी गई।
इसके जरिए उनकी निजी जानकारियों और वीडियो क्लिपिंग्स को इकट्ठा कर उन्हें ब्लैकमेल किया गया। इस दबाव के चलते कई जनप्रतिनिधियों ने अपना पाला बदल लिया और भाजपा के साथ जा मिले।
विपक्षी नेताओं के हवाले से लगाए आरोप
सामना में महाराष्ट्र कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार का भी हवाला दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना और एनसीपी के विधायकों को केंद्रीय एजेंसियों के दबाव और हनीट्रैप के जरिए मजबूर किया गया। वडेट्टीवार की यह टिप्पणी पहले भी चर्चा में रही थी, लेकिन अब सामना में इसे फिर से उछाला गया है और गंभीरता से लेने की बात कही गई है।
एकनाथ शिंदे को मिली 'सबूतों' से भरी पेन ड्राइव?
संपादकीय में यह सनसनीखेज दावा भी किया गया है कि उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ बगावत करने से पहले एकनाथ शिंदे को एक पेन ड्राइव सौंपी गई थी, जिसमें विधायकों और सांसदों के हनीट्रैप से जुड़े वीडियो और सबूत मौजूद थे। इस पेन ड्राइव के मिलने के बाद ही शिंदे सूरत, फिर गुवाहाटी और अंत में गोवा रवाना हुए थे।
सामना ने इस पूरी घटना को एक “सस्पेंस थ्रिलर” की तरह करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक घटनाक्रम नहीं था, बल्कि गहरी साजिश थी।
फडणवीस और गृह विभाग पर भी आरोप
सामना में सीधे तौर पर तत्कालीन विपक्ष के नेता और मौजूदा उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी आरोप लगाए गए। कहा गया है कि उन्होंने गृह विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर विधायकों पर दबाव बनाया और उन्हें धमकाया गया।
संपादकीय में यह भी बताया गया कि शुरुआत में शिंदे के पास केवल 9 या 10 विधायकों का समर्थन था, लेकिन बाद में विधायकों को डराकर या फंसाकर संख्या बल बढ़ाया गया।
कई मंत्रियों को हटाने की मांग
सामना में शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी के कुछ मौजूदा मंत्रियों पर भी निशाना साधा गया है। संजय शिरसाट, योगेश कदम, दादा भुसे और माणिक कोकाटे जैसे नेताओं को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की गई है।
यह भी कहा गया कि इनमें से कुछ नेता हनीट्रैप में फंस चुके थे और अब उनके आचरण से साफ है कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में जल्द ही फेरबदल हो सकता है।
राजनीति में जासूसी का नया अध्याय
इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में जासूसी और निजी जीवन में दखल जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर किया है। अगर सामना के आरोपों में सच्चाई है, तो यह भारतीय लोकतंत्र और राजनीतिक शुचिता के लिए एक बड़ा खतरा है।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक भाजपा या एकनाथ शिंदे गुट की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस दावे को लेकर हलचल मच चुकी है।

