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मालीगांव।पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) सांस्कृतिक संघ, मालीगांव पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विशेष रूप से युवाओं के बीच आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्तियों को बढ़ावा देने में लंबे समय से अग्रणी रहा है। इसी परंपरा को निभाते हुए इस संघ ने 18 जुलाई को मालीगांव स्थित रंग भवन में ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक कार्यशाला का समापन समारोह सफलतापूर्वक आयोजित किया।

समारोह के एक हिस्से के रूप में, हाल ही में एनएफआर के रंग भवन में एक वाइब्रेंट सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने रेल समुदाय की कलात्मक भावना को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही। कार्यशाला पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक समृद्धि का एक जीवंत उत्सव रही, जिसमें प्रतिभागियों को इस क्षेत्र की कुछ सबसे प्रतिष्ठित लोक परंपराओं जैसे बिहू, बागुरुम्बा (बोडो नृत्य), झूमुर एवं अन्य पारंपरिक नृत्यों के साथ-साथ आत्मा को छू लेने वाले लोक गीत, जीवंत आधुनिक गीत, समकालीन नृत्य, संगीत, नाट्य और ललित कलाओं में गहन प्रशिक्षण दिया गया। यह पहल युवा सांस्कृतिक उत्साही लोगों और रेल परिवार के सदस्यों के लिए एक गतिशील मंच बन गई, जहां उन्होंने न केवल अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर प्राप्त किया, बल्कि आधुनिक कलात्मक शैलियों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन भी किया।
Editorial

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