✕
जल संधि सस्पेंड; अब पानी को लेकर पाकिस्तान में खलबली!
By EditorialPublished on 2 July 2025 5:30 AM IST
सिंधु जल संकट के बीच पाकिस्तान का डायमर भाषा डैम प्रोजेक्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। यह बांध खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान के बीच सिंधु नदी पर बनाया जा रहा है, जिसकी नींव इमरान खान सरकार के दौरान रखी गई थी। हालांकि, इस परियोजना को भारत के कड़े विरोध और स्थानीय लोगों की नाराज़गी के चलते अब तक कई अड़चनों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में सिंधु जल संधि के भविष्य पर उठते सवालों के बीच, यह डैम पाकिस्तान की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

x

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान अब एक नई रणनीति पर काम कर रहा है। तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 'रोना-पीटना' करने और भारत पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिशों के बाद अब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की है कि पाकिस्तान अपनी जल भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएगा। इसके तहत डायमर भाषा डैम समेत अन्य जल संसाधनों को विकसित करने की योजना पर काम तेज़ कर दिया गया है।
भारत ने रोका पानी, पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी :
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई, जब भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया। इसके बाद से पाकिस्तान बार-बार इस संधि की बहाली के लिए गुहार लगाता रहा — लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि जब तक आतंकवाद और POK से जुड़े मुद्दे हल नहीं होते, कोई बात नहीं होगी।
पाकिस्तान ने युद्ध की धमकी, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शिकायत और दुनियाभर से समर्थन जुटाने की कोशिश की, लेकिन हर बार नाकामी ही हाथ लगी। वर्ल्ड बैंक ने भी इसे भारत-पाक का द्विपक्षीय मामला बताकर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
अब जल भंडारण क्षमता बढ़ाएगा पाकिस्तान :
नाउम्मीद पाकिस्तान ने अब 'पानी को हथियार' बताकर भारत पर आरोप लगाए हैं। मंगलवार (1 जुलाई) को शहबाज शरीफ ने कहा: “हम जल भंडारण क्षमता बढ़ाएंगे ताकि भारत हमें पानी से ब्लैकमेल न कर सके। डायमर भाषा डैम और अन्य संसाधनों के ज़रिए हम गैर-विवादास्पद पानी को रोकने की व्यवस्था करेंगे।”
डायमर भाषा डैम: विवादों में घिरा निर्माण
यह डैम खैबर पख्तूनख्वा के कोहिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान के डायमर ज़िले के बीच बनाया जा रहा है। इसकी नींव इमरान खान सरकार में रखी गई थी। लेकिन भारत ने इस डैम का विरोध किया क्योंकि यह क्षेत्र पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आता है, जिसे भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है।
इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने भी डैम का ज़ोरदार विरोध किया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी ज़मीन, पुनर्वास और मुआवजे की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे इसे बनने नहीं देंगे। हालांकि शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि यह प्रोजेक्ट 1991 के अंतःप्रांतीय जल समझौते के अंतर्गत वैध है और उनकी सरकार इसे 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखती है।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
क्या कहता है सिंधु जल संधि का इतिहास ?
1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी, जिसके तहत रावी, ब्यास, सतलज नदियों का जल भारत को और सिंधु, झेलम, चिनाब का पानी पाकिस्तान को मिला। लेकिन जब से भारत ने इस संधि को स्थगित किया, पाकिस्तान की हालत खराब हो गई है क्योंकि उसकी 80% जल निर्भरता इन्हीं तीन नदियों पर है।
भारत की सख्ती और दुनिया से मिली बेरुखी के बाद पाकिस्तान ने अब जल भंडारण क्षमता बढ़ाकर खुद को 'स्वावलंबी' बनाने की बात कही है। लेकिन विवादित जमीन पर बन रहे डैम, स्थानीय विरोध और भारत की कड़ी आपत्ति के चलते यह परियोजना आगे कितनी सफल होगी, यह कहना अभी मुश्किल है। इतना तय है कि सिंधु नदी की बहती धाराएं आने वाले वक्त में दक्षिण एशिया की जल राजनीति का केंद्र बनने वाली हैं।

Editorial
Next Story
Related News
X
