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उद्धव-राज की एकता पर राणे ने उठाए सवाल; बोले 'दो भाई नहीं...'
By EditorialPublished on
महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बंधुओं की संभावित एकता की अटकलों पर पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने बड़ा बयान दिया है। उद्धव और राज ठाकरे के एक साथ आने के सवाल पर राणे ने कहा, ये दो भाई नहीं हैं... और साथ ही स्पष्ट किया कि राज ठाकरे किसके साथ जाते हैं, यह उनका निजी फैसला है, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। राणे के इस बयान ने न सिर्फ शिवसेना के भीतर पुराने मतभेदों को फिर से उजागर किया है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गर्मी भी बढ़ा दी है।

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उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की संभावित राजनीतिक एकता पर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने बुधवार (2 जुलाई, 2025) को इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राणे ने साफ कहा कि “दो भाई नहीं, सबको ले आओ, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।” उन्होंने ठाकरे बंधुओं की एकजुटता पर तंज कसते हुए कहा कि अब यह राज ठाकरे का फैसला है कि उन्हें साथ जाना है या नहीं।
"किसी को फर्क नहीं पड़ता" – राणे का पलटवार
उद्धव ठाकरे ने कुछ दिन पहले बयान दिया था कि अगर दो भाई साथ आ रहे हैं तो बीजेपी को तकलीफ क्यों हो रही है। इसके जवाब में राणे ने कहा: “हम लोगों को कोई तकलीफ नहीं है। दो भाई नहीं, जितनों को साथ लाना है ले आओ। पहले भी ये लोग साथ थे। बीजेपी, एकनाथ शिंदे और अजित पवार की तिकड़ी के पास आज 235 विधायक हैं। हमें कोई चिंता नहीं है।”
राज ठाकरे का फैसला, हमारी जिम्मेदारी नहीं :
नारायण राणे ने राज ठाकरे के फैसले को लेकर भी सीधा कहा कि: “उन्हें साथ जाना है या नहीं, ये उनका सवाल है। सही है या नहीं, ये पहचानना भी उनकी जिम्मेदारी है, हमारी थोड़ी है।” इस बयान से साफ है कि बीजेपी राज ठाकरे की भूमिका को लेकर सहज तो है, लेकिन उस पर भरोसा नहीं कर रही।
मराठी भाषा विवाद पर उद्धव पर हमला :
मराठी भाषा विवाद को लेकर भी राणे ने उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा: “राजनीति के लिए अब मुद्दा चाहिए। उन्हें कोई बड़ा सवाल नहीं मिलता। जब वे मुख्यमंत्री थे, तब भी उन्होंने कुछ नहीं किया। ढाई साल में दो दिन मंत्रालय में आए। किसानों, कामगारों या आम जनता के मुद्दे उठाना उनकी ताकत नहीं है।”
"कितने मराठी युवाओं को नौकरी दी?" :
राणे ने उद्धव ठाकरे के ‘मराठी’ प्रेम पर सवाल उठाते हुए कहा: “उद्धव ठाकरे को पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने मराठी युवाओं को नौकरी देने के लिए क्या किया? क्या कोई नीति लाई? नहीं। सोनिया गांधी और शरद पवार के साथ सरकार बना ली, तब मराठी की याद नहीं आई?”
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हिंदी भाषी दुकानदार की पिटाई पर भी बोले :
जब राणे से हिंदी भाषी दुकानदार की पिटाई पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया: “मुझे उस घटना की जानकारी नहीं है। लेकिन किसी भी भाषी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए।”
राणे के इस बयान ने ठाकरे परिवार की संभावित एकता को लेकर बीजेपी की स्पष्ट लाइन खींच दी है राजनीति में अब भावनाओं से ज्यादा गणित मायने रखता है। 2024 लोकसभा के बाद अब 2025-26 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की सियासी बिसात पर हर गठजोड़, हर बयान एक चाल बन चुका है।

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