नई दिल्ली।
केंद्र सरकार मिडिल क्लास के लिए एक और बड़ी राहत की तैयारी में है। इनकम टैक्स में छूट देने के बाद अब सरकार वस्तु एवं सेवा कर (GST) में भी छूट देने की योजना बना रही है। इस कदम से उन लाखों परिवारों को राहत मिल सकती है जो बढ़ती महंगाई से परेशान हैं और जिनका मासिक बजट अब भी प्रभावित है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब को या तो पूरी तरह खत्म करने या उसे 5 प्रतिशत वाले स्लैब में शामिल करने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो मिडिल क्लास के लिए जरूरी वस्तुएं काफी सस्ती हो सकती हैं।


मिडिल क्लास पर फोकस

सरकार का यह कदम खास तौर पर मिडिल क्लास और लोअर इनकम ग्रुप को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। इन वर्गों के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने बीते कुछ वर्षों में जीवन यापन को मुश्किल बना दिया है। खासकर कोरोना महामारी के बाद से नौकरी और कमाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच महंगाई एक बड़ी चुनौती रही है।

अब केंद्र सरकार का फोकस इन वर्गों को राहत देने पर है। जीएसटी स्लैब में संभावित बदलाव से मिडिल क्लास की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम हो सकता है।

इन वस्तुओं के सस्ते होने की उम्मीद

रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद जिन वस्तुओं के सस्ते होने की संभावना है, उनमें शामिल हैं:

  • टूथपेस्ट और टूथपाउडर

  • छाता

  • सिलाई मशीन

  • प्रेशर कुकर और रसोई के अन्य बर्तन

  • इलेक्ट्रिक इस्त्री

  • गीजर

  • छोटी क्षमता वाली वॉशिंग मशीन

  • साइकिल

  • 1000 रुपये से अधिक के रेडीमेड कपड़े

  • 500 से 1000 रुपये के बीच के जूते

  • स्टेशनरी आइटम

  • सिरेमिक टाइलें

  • कृषि उपकरण

ये सभी वस्तुएं आमतौर पर मिडिल क्लास और निम्न आय वर्ग द्वारा अधिक खरीदी जाती हैं। इनकी कीमत में कटौती से रोजमर्रा की जिंदगी में सीधा फायदा होगा।


जीएसटी सिस्टम को सरल बनाने पर विचार

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार एक ऐसा जीएसटी सिस्टम तैयार करने पर भी विचार कर रही है जो सरल हो और आम आदमी के लिए समझना आसान हो। इसके साथ ही टैक्स अनुपालन भी आसान बनाया जाएगा। इससे व्यापारियों को भी राहत मिलेगी और टैक्स चोरी जैसी समस्याओं में भी कमी आ सकती है।

सरकार पर पड़ेगा 50,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

इस योजना को लागू करने के लिए सरकार को शुरूआती तौर पर 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान झेलना पड़ सकता है। लेकिन सरकार का मानना है कि कम कीमतों से खपत बढ़ेगी और इसके चलते जीएसटी कलेक्शन में दीर्घकालीन इजाफा होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ये कदम उठाती है, तो मिडिल क्लास का आर्थिक दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है और बाजार में खपत को बल मिल सकता है।

वित्त मंत्री के संकेत

हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक इंटरव्यू में जीएसटी दरों में संभावित बदलाव के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार एक अधिक ‘तर्कसंगत’ जीएसटी स्ट्रक्चर की दिशा में काम कर रही है और मिडिल क्लास को आवश्यक वस्तुओं पर राहत देने का विचार किया जा रहा है। उन्होंने माना कि पिछले वर्षों में टैक्स सिस्टम में सुधार की आवश्यकता महसूस की गई है और अब समय है कि आम जनता को भी उसका लाभ मिले।

उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया

मिडिल क्लास से आने वाले उपभोक्ता इस खबर को लेकर आशान्वित हैं। दिल्ली निवासी प्रिया शर्मा कहती हैं, "हमारे लिए हर महीने का बजट एक चुनौती होता है। अगर रोजमर्रा की चीजें थोड़ी भी सस्ती हो जाएं तो राहत मिलती है।" इसी तरह मुंबई के रिटायर्ड प्रोफेसर संजीव कपूर का कहना है, "इनकम टैक्स में छूट और अब जीएसटी कटौती – ये दोनों कदम मिडिल क्लास के लिए बड़ी राहत हैं।"

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सही समय पर लिया गया है। देश की अर्थव्यवस्था में खपत का अहम योगदान होता है और मिडिल क्लास इसका बड़ा हिस्सा है। अगर उनकी खरीदने की शक्ति बढ़ती है, तो अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।


मिडिल क्लास भारतीय समाज की रीढ़ है और सरकार द्वारा उठाया जा रहा यह कदम निश्चित रूप से इस वर्ग को राहत देने वाला है। अगर प्रस्तावित जीएसटी कटौती लागू होती है, तो न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी बल्कि बाजार में मांग भी बढ़ेगी। इससे अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है और सरकार का राजस्व भी दीर्घकालिक रूप से बढ़ सकता है।

अब सबकी निगाहें सरकार के अंतिम फैसले पर हैं। अगर केंद्र इसे बजट 2025-26 का हिस्सा बनाता है, तो मिडिल क्लास को यह एक बड़ा तोहफा साबित हो सकता है।

Editorial

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