पटना / मथुरा |
बिहार में मुफ्त बिजली की घोषणा के बाद जहां जनता में उम्मीद की एक नई किरण जगी है, वहीं उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इस पर करारा तंज कसते हुए राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। शर्मा ने कहा,

"ना बिजली आएगी, ना बिल आएगा... हो गई बिजली फ्री!"

ये बयान यूं तो एक कटाक्ष था, लेकिन इसके पीछे छिपे चुनावी संदेश और सियासी रणनीति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर तब, जब बिहार 2025 के अंत में विधानसभा चुनावों की तरफ बढ़ रहा है।



125 यूनिट फ्री बिजली: नीतीश कुमार का बड़ा दांव!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में घोषणा की कि राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी।

यह फैसला बिहार कैबिनेट की बैठक में पारित हुआ, जिसमें सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए ₹3,797 करोड़ की राशि बिजली कंपनियों को देने की बात कही।

सरकार इसे “जन-हितैषी निर्णय” बता रही है, लेकिन विपक्षी दल और कुछ राज्यों के नेता इसे “चुनावी लॉलीपॉप” कह रहे हैं।



एके शर्मा का हमला: "बिजली ही नहीं आएगी, तो फ्री क्या?"

मथुरा में पत्रकारों से बात करते हुए योगी सरकार के मंत्री एके शर्मा ने बिहार सरकार की योजना पर चुटकी लेते हुए कहा:

"बिहार में बिजली फ्री है, लेकिन बिजली तब आएगी न जब फ्री होगी।

न बिजली आएगी, न बिल आएगा... बिजली फ्री हो गई।
हम (UP) बिजली दे रहे हैं।"

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कांग्रेस ने प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर तंज कसते हुए लिखा –

"BJP-JDU सरकार ने बिहार में बिजली फ्री देने का जुमला फेंका है.

इस जुमले की हवा निकालने का काम BJP सरकार के ऊर्जा मंत्री ने कर दिया."


बिहार में चुनावी मोड शुरू: क्या फ्री बिजली बनेगी मास्टरस्ट्रोक?

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले नीतीश सरकार का यह फैसला मुफ्त सुविधाओं की राजनीति का नया अध्याय खोल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में महंगाई, बेरोजगारी और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों के बीच यह घोषणा नीतीश कुमार के लिए वोट खींचने का बड़ा दांव हो सकती है।

लेकिन इस दावे को लेकर भी जनता में आशंका है –

  • क्या राज्य में बिजली आपूर्ति का नेटवर्क इतना मजबूत है?

  • क्या 125 यूनिट वाकई में सभी घरों तक पहुंचेगी?

  • और सबसे अहम – क्या यह सिर्फ वोट हासिल करने का तरीका है?



विपक्ष और सोशल मीडिया की निगाहें नीतीश सरकार पर

जहां भाजपा और यूपी के मंत्री इस योजना को “झूठे वादे” और “अव्यवहारिक” बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दल इसे जनता के हित में उठाया गया साहसिक कदम बता रहे हैं।

हालांकि, एक सच्चाई ये भी है कि बिहार में अब भी कई गांवों में बिजली की उपलब्धता अस्थिर है, और शहरी क्षेत्रों में भी कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है।



सोलर प्लान भी शामिल: लेकिन कितने होंगे लाभान्वित?

125 यूनिट मुफ्त बिजली के साथ ही बिहार सरकार ने घरों में 1.1 किलोवाट सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी योजना की भी घोषणा की है।
परंतु सवाल वही है –

क्या ये योजनाएं सिर्फ कागजों पर रह जाएंगी,
या वाकई जमीन पर उतरेंगी?


बिजली पर सियासत अभी बाकी है...

बिहार में बिजली को लेकर यह सियासी तकरार आने वाले महीनों में और तेज होने वाली है। नीतीश कुमार की ये योजना जहां उन्हें चुनावी बढ़त दे सकती है, वहीं भाजपा और सहयोगी दल इसे झूठे वादों का पुलिंदा बताकर चुनाव में घेर सकते हैं।

और अब जब सवाल "बिजली आएगी या नहीं" का नहीं, बल्कि "कितना वोट खींचेगी" का है – तो तय मानिए, आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में और भी ज्यादा करंट दौड़ने वाला है!

Editorial

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