समस्तीपुर थाना में घूसकांड! थानाध्यक्ष पुतुल कुमारी 20 हजार रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
बिहार / समस्तीपुर | 19 जुलाई 2025 की दोपहर समस्तीपुर जिले में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे पुलिस विभाग की साख पर सवालिया निशान लगा दिया। एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार मिटाने की बात करती है, तो दूसरी तरफ वर्दी पहनने वाले कुछ लोग उसी भ्रष्टाचार को अपने पांवों से कुचलते नहीं, बल्कि खुद उसमें लिप्त पाए जाते हैं।


बिहार / समस्तीपुर | 19 जुलाई 2025 की दोपहर समस्तीपुर जिले में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे पुलिस विभाग की साख पर सवालिया निशान लगा दिया। एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार मिटाने की बात करती है, तो दूसरी तरफ वर्दी पहनने वाले कुछ लोग उसी भ्रष्टाचार को अपने पांवों से कुचलते नहीं, बल्कि खुद उसमें लिप्त पाए जाते हैं।
इस बार आरोपी कोई आम सिपाही नहीं, बल्कि महिला थाना की थानाध्यक्ष थीं – पुतुल कुमारी। हैरानी की बात यह रही कि वह रिश्वत लेने के लिए अपने निजी ड्राइवर गुड्डू कुमार का इस्तेमाल कर रही थीं, ताकि खुद सीधे हाथ न गंदे हों। लेकिन निगरानी विभाग की सजगता ने उनके पूरे तंत्र की पोल खोलकर रख दी।
कैसे हुआ खुलासा?
समस्तीपुर जिले के छतौना पंचायत निवासी राजीव रंजन सिंह के खिलाफ महिला थाने में एक महिला ने आवेदन दिया था। इसके बाद थानाध्यक्ष ने राजीव को नोटिस भेजकर थाने बुलाया और अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दे दिया कि मामला निपटाने के लिए 20 हजार रुपये देने होंगे। पैसे की मांग थाने के चालक गुड्डू कुमार के जरिए की गई, ताकि पुतुल कुमारी पर सीधा आरोप न लगे।
इससे परेशान होकर राजीव रंजन ने निगरानी विभाग से संपर्क किया और पूरी बात विस्तार से बताई। जांच में मामला सही निकला। इसके बाद टीम ने योजना बनाई और जाल बिछाया।
रंगे हाथों पकड़ी गई थानाध्यक्ष
जैसे ही राजीव ने 20 हजार रुपये की रिश्वत चालक गुड्डू को दी और वह पैसे थानाध्यक्ष पुतुल कुमारी तक पहुंचे, निगरानी टीम ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। टीम ने न केवल रकम बरामद की, बल्कि पूरे घटनाक्रम को दस्तावेजी सबूतों के साथ रिकॉर्ड भी किया।
पुलिस विभाग में हड़कंप
इस घटना के बाद समस्तीपुर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। थानाध्यक्ष का इस तरह घूस लेते पकड़ा जाना, वह भी महिला थाने की जिम्मेदार अधिकारी के रूप में, पूरे महकमे के लिए शर्मनाक स्थिति है। दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, और जल्द ही उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।
बड़ा सवाल: क्या अब बदलेगी व्यवस्था?
इस कांड ने एक बार फिर ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर आम जनता को न्याय देने वाली कुर्सी पर बैठे लोग ही रिश्वत के दलदल में फंसे होंगे, तो जनता कहां जाएगी?
निगरानी विभाग की यह कार्रवाई भले ही प्रशंसनीय हो, लेकिन इससे कहीं ज्यादा ज़रूरत इस बात की है कि पुलिसिंग सिस्टम में आंतरिक साफ-सफाई की जाए।

