मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में रोहित पवार मुंबई के एक पुलिस स्टेशन के अंदर पुलिस अधिकारियों को डांटते, धमकाते और दबाव बनाते नजर आ रहे हैं। पूरे घटनाक्रम की तुलना लोग फिल्म ?सिंघम? के कुख्यात विलेन ?जयकांत शिखरे? से कर रहे हैं।



'जयकांत शिखरे' स्टाइल में दिखे रोहित पवार

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रोहित पवार अपने दर्जनों समर्थकों के साथ थाने में घुसते हैं और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों पर तीखी भाषा में सवाल-जवाब करने लगते हैं। बात बढ़ते-बढ़ते इस स्तर पर पहुंच जाती है कि रोहित पवार एक पुलिस अधिकारी को धमकी देते हुए कहते हैं ? "हाथ ऊपर किया तो बताऊंगा!" इस तरह का बयान न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।



क्यों पहुंचे थे रोहित पवार थाने?

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला मुंबई के एक पुलिस थाने का है, जहां किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक विवाद को लेकर रोहित पवार पुलिस से बात करने पहुंचे थे। मगर बातचीत के बजाय मामला गरमा गया और रोहित पवार ने अधिकारियों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी।



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'सत्ता का नशा' या 'सीधी गुंडागर्दी'?

वीडियो सामने आने के बाद आम जनता से लेकर विपक्ष तक हर कोई रोहित पवार के व्यवहार की आलोचना कर रहा है। लोग इसे सत्ता का घमंड बता रहे हैं और पूछ रहे हैं कि अगर कोई आम आदमी ऐसा करता, तो उस पर अब तक कितनी धाराओं में मुकदमा दर्ज हो चुका होता? सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा ?

"ये जयकांत शिखरे नहीं, रोहित पवार हैं ? अब असली में!"
"नेता सत्ता में आते ही कानून से ऊपर कैसे हो जाते हैं?"


विपक्ष ने उ� ाई कार्रवाई की मांग

विपक्षी पार्टियों ने इस घटना को लेकर आक्रोश जताया है। भाजपा और अन्य दलों के नेताओं ने कहा कि रोहित पवार का यह व्यवहार पुलिस के मनोबल पर हमला है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा नेता ने कहा,

"अगर पुलिस अफसरों को ऐसे धमकाया जाएगा, तो आम जनता की सुरक्षा कौन करेगा?"


मुंबई पुलिस ने शुरू की जांच

विवाद बढ़ता देख मुंबई पुलिस ने वीडियो और शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि सवाल यह भी उ� रहा है कि क्या रोहित पवार के खिलाफ कार्रवाई होगी, जब सरकार खुद उनके गुट की है?



क्या कानून सबके लिए समान?

रोहित पवार की यह घटना सिर्फ एक नेता की हरकत नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे सत्ता और राजनीतिक प्रभाव के कारण कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि मुंबई पुलिस रोहित पवार पर कोई � ोस कार्रवाई करती है या यह मामला भी धीरे-धीरे � ंडे बस्ते में चला जाएगा।

Editorial

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