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एक संगठन, 32 देश ; जानिए क्यों इतना ताकतवर है NATO
By EditorialPublished on
हाल ही में NATO के चीफ की ओर से भारत समेत दो अन्य देशों पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी गई है, जिसके बाद यह सैन्य संगठन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। लेकिन सवाल यह है कि NATO आखिर है क्या? और इसकी ताकत इतनी ज्यादा क्यों मानी जाती है कि दुनिया के बड़े-बड़े देश इसके फैसलों को गंभीरता से लेते हैं? 32 देशों के गठबंधन वाला यह संगठन सिर्फ सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव का भी केंद्र है। चलिए, जानते हैं कि NATO कितनी बड़ी ताकत है और यह वैश्विक राजनीति में कैसे असर डालता है।

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हाल ही में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) के प्रमुख मार्क रुटे ने भारत, चीन और ब्राजील को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इन देशों ने रूस से तेल और गैस का व्यापार जारी रखा, तो उन्हें 100% सख्त टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। इस धमकी के बाद सवाल उठ रहे हैं कि एक सैन्य संगठन आखिर भारत को व्यापार नीति पर कैसे धमका सकता है?
NATO : एक वैश्विक सैन्य शक्ति
NATO दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य गठबंधन है, जिसमें 30 देश शामिल हैं जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे बड़े सैन्य बल हैं। इस संगठन का गठन 4 अप्रैल 1949 को अमेरिका के वाशिंगटन में हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य था सोवियत संघ के विस्तार को रोकना और पश्चिमी यूरोप की रक्षा करना। वर्तमान में इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स, बेल्जियम में स्थित है।
कैसे काम करता है NATO ?
NATO का सबसे बड़ा सिद्धांत है सामूहिक सुरक्षा। यदि संगठन के किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो वह सभी 30 देशों पर हमला माना जाता है। यही इसे वैश्विक स्तर पर एक ताकतवर और खतरनाक गठबंधन बनाता है। NATO देशों का कुल मिलाकर दुनिया के सैन्य खर्च का 70% हिस्सा होता है, जिसमें अमेरिका अकेले सबसे ज्यादा निवेश करता है।
भारत और NATO: कोई सीधा संबंध नहीं :
भारत NATO का सदस्य नहीं है। वास्तव में, NATO में एशिया का कोई भी देश शामिल नहीं है। भारत को अतीत में सदस्य बनने के प्रस्ताव मिले, लेकिन भारत ने हमेशा अपनी गैर-पक्षीय और स्वतंत्र विदेश नीति के तहत इन्हें ठुकरा दिया है।
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फिर भारत को धमकी क्यों ?
NATO प्रमुख का यह बयान कई विश्लेषकों को हैरान कर गया है, क्योंकि यह संगठन आमतौर पर सैन्य और सुरक्षा मामलों तक ही सीमित रहता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान अमेरिकी राजनीतिक दबाव में आकर दिया गया हो सकता है, खासकर ट्रंप की विदेश नीति के दृष्टिकोण को देखते हुए। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
NATO वाकई एक बेहद ताकतवर संगठन है, लेकिन उसकी ताकत सैन्य और राजनीतिक सुरक्षा तक सीमित मानी जाती है। भारत जैसे संप्रभु राष्ट्र को व्यापारिक फैसलों पर धमकाना न केवल असामान्य है, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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