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मुंबई। पारंपरिक रूप से सोना जमा करने के लिए प्रसिद्ध निवेशक अब तेजी से चांदी की ओर झुक रहे हैं। सोमवार को चांदी की कीमत 14 वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई, क्योंकि इस साल इसके रिटर्न्स ने सोने को पीछे छोड़ दिया।
नियमित रूप से सोने के सिक्के खरीदने वाले उमेश अग्रवाल ने हाल ही में पहली बार 1 किलोग्राम चांदी का बार खरीदा और उम्मीद जताई कि चांदी भी अब वैसा ही रिटर्न देगी जैसा सोने ने पिछले कुछ वर्षों में दिया।
पिछले 3 महीनों में घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में 21% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में सोने में केवल 5% की वृद्धि हुई है। यह पिछले वर्ष के ठीक उलट है, जब सोना 34% बढ़ा था और चांदी केवल 23% बढ़ी थी।
चांदी में निवेश की मांग न सिर्फ निवेश बल्कि उद्योगों से भी आ रही है, विशेषकर सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों में, जिससे चांदी की मांग उत्पादन से भी अधिक हो गई है।
आम्रपाली ग्रुप गुजरात के मुख्य कार्यकारी चिराग ठक्कर ने बताया कि आमतौर पर जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती हैं, तो निवेशक चांदी के सिक्के व बार बेचते हैं या ईटीएफ से बाहर निकलते हैं। लेकिन इस बार, रिकॉर्ड कीमतों पर भी लोग खरीदारी कर रहे हैं।
चांदी ईटीएफ में जून में रिकॉर्ड 2,004 करोड़ रु. का निवेश हुआ, जो मई के 853 रु. करोड़ के आंकड़े से कहीं अधिक है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) द्वारा दी ग
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