निमिषा प्रिया को रहम नहीं; तलाल  के भाई बड़ा बयान ..
भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी पर मिली अस्थायी राहत अब कमजोर पड़ती नज़र आ रही है। यमन में हत्या के दोष में सजा पाए जाने के बाद बुधवार, 16 मई 2025 को उसे फांसी दी जानी थी। हालांकि भारत सरकार, धार्मिक हस्तियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की कोशिशों के बाद उसकी फांसी को फिलहाल टाल दिया गया है। लेकिन मृतक तलाल अब्दो मेहदी के परिवार का रुख अब भी बेहद सख्त है।
तलाल के भाई अब्देलफत्ताह मेहदी ने साफ शब्दों में कहा है कि वे ब्लड मनी (खून-बदले पैसे) स्वीकार नहीं करेंगे और उन्होंने समझौते के सभी प्रस्ताव खारिज कर दिए हैं। उनका कहना है कि यह अपराध माफ किए जाने योग्य नहीं है और निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत ही मिलनी चाहिए।
'खून खरीदा नहीं जा सकता, अल्लाह हमारे साथ है'
अब्देलफत्ताह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "खून को खरीदा नहीं जा सकता। न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन वह होकर रहेगा। यह सिर्फ वक्त की बात है और अल्लाह हमारे साथ है।" उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी गहरी नाराजगी जताई, जिसमें निमिषा प्रिया को 'पीड़ित' बताया गया। उन्होंने कहा कि एक कातिल को किसी भी तरह से निर्दोष या पीड़ित के तौर पर पेश करना गलत है।
भारत और धार्मिक नेताओं की पहल पर मिली थी राहत :
बुधवार को जब निमिषा को फांसी दी जानी थी, उससे पहले ही भारतीय सरकार, यमन में भारतीय राजनयिक मिशन, सऊदी अरब स्थित कुछ एजेंसियों और केरल के कंठपुरम के ग्रैंड मुफ़्ती ए.पी. अबूबकर मुसलियार के हस्तक्षेप के चलते फांसी को टाल दिया गया। मुसलियार ने कथित तौर पर यमन की शूरा काउंसिल में मध्यस्थता के लिए प्रयास किया था।
इस प्रयास के बाद यह निर्णय लिया गया कि निमिषा के परिजनों को कुछ और समय दिया जाएगा ताकि वे तलाल के परिवार को ब्लड मनी के लिए मना सकें। लेकिन तलाल का परिवार इस संभावना को पूरी तरह नकार रहा है।
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‘समझौते की कोई गुंजाइश नहीं’ :
अब्देलफत्ताह मेहदी ने कहा, "हमारे परिवार ने सभी समझौते ठुकरा दिए हैं। यह कोई साधारण अपराध नहीं है। मेरी मां आज भी रोती हैं। क्या पैसा उसकी तकलीफ मिटा सकता है? हम सिर्फ इंसाफ चाहते हैं।"
मामले पर बनी रहेगी नजर :
यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील बन चुका है। भारतीय सरकार समेत कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं कोशिशों में जुटी हैं कि किसी तरह निमिषा की जान बचाई जा सके। लेकिन जिस तरह से तलाल के परिवार ने सार्वजनिक रूप से ब्लड मनी से इनकार किया है, उससे साफ है कि इस कानूनी लड़ाई में अभी कई मोड़ आने बाकी हैं।
Editorial

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