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'दोस्त’ की मौजूदगी में जयशंकर ने पाकिस्तान की ली क्लास!
By EditorialPublished on
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के तिआनजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले का मुद्दा उठाया। उन्होंने बैठक में दो टूक कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इसके खिलाफ सामूहिक कार्रवाई जरूरी है। उनका यह बयान चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है।

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चीन के तियानजिन शहर में मंगलवार को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर तीखा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान पर परोक्ष हमला बोला। जयशंकर ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और एससीओ देशों को चेताया कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ अडिग नीति ही इस संगठन की नींव है।
"हमले का उद्देश्य था पर्यटन और धार्मिक सद्भाव को तोड़ना"
जयशंकर ने कहा कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ हमला जानबूझकर राज्य की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और धार्मिक विभाजन पैदा करने की साजिश थी। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और अपराधियों, उनके प्रायोजकों व फंडिंग स्रोतों को सज़ा दिलाने की आवश्यकता बताई है।
“आतंकवाद पर समझौता नहीं” – SCO की मूल भावना :
जयशंकर ने एससीओ के उद्देश्य की याद दिलाते हुए कहा, “इस संगठन की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुकाबले के लिए हुई थी। आज भी अगर हमें प्रभावी बने रहना है, तो हमें इन खतरों के खिलाफ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहिए।”
“दुनिया बहुध्रुवीय हो रही है”
जयशंकर ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में बात करते हुए कहा कि दुनिया आज बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है, जहां केवल देश नहीं, बल्कि SCO जैसे क्षेत्रीय संगठन भी वैश्विक स्थिरता में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया को साझा एजेंडे और सामूहिक सहयोग के जरिए ही स्थिर और संतुलित बनाया जा सकता है।
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साझेदारी और विश्वास की अपील :
अपने संबोधन के अंत में जयशंकर ने SCO के भीतर गहरे सहयोग और पारस्परिक विश्वास की वकालत करते हुए कहा, “अगर हम चाहते हैं कि दुनिया की नीतियों और घटनाक्रमों में SCO की भूमिका प्रभावी हो, तो हमें एकजुटता के साथ साझा एजेंडे पर कार्य करना होगा।”
एस. जयशंकर का यह बयान न सिर्फ भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को दोहराता है, बल्कि पाकिस्तान और आतंक को समर्थन देने वाले तत्वों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ संदेश भी देता है। साथ ही यह SCO जैसे मंचों की भूमिका को भी मजबूत करता है।

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