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मुंबई। शनिवार को पनवेल जैन स्थानक में श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि महाराज के सानिध्य में त्रिलोक ऋषि मसा की जयंती सामायिक दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर युवाचार्य ने धर्मसभा में कहा कि त्रिलोक ऋषि जैसे महापुरुषों का जीवन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में क्रांति का संदेश देता है। केवल 36 वर्ष की आयु में उन्होंने जो काव्य रचना, ज्ञान साधना, व्याकरण का अध्ययन और आगमों का लेखन समाज को दिया, वह आज भी सभी के लिए एक अमूल्य धरोहर बना हुआ है। उन्होंने अलग-अलग धर्मों का अध्ययन कर उन्हें सहजता से प्रस्तुत किया और समाज को एक नई दृष्टि दी। युवाचार्य ने आगे कहा कि लेखन और वाचन अपने आप में सरस्वती की आराधना है। शब्दों की कीमत होती है। अपने मन के भावों को लेखनी में उतारना सौंदर्य का सबसे सुंदर स्वरूप है। इस विधा की जगह कोई और नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि श्रुत साधना को जीवन का लक्ष्य बनाएंगे तो मानव भव को सार्थक बना सकते हैं। शिविर संयोजक शैलेन्द्र खैरोदिया ने बताया कि युवाचार्य के सान्निध्य में 65 भाई-बहनों ने प्रातः 10 से सायं 4 बजे तक ध्यान साधना की। यह जानकारी प्रवक्ता सुनील चपलोत ने दी।
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