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एयर इंडिया हादसा: मेंटेनेंस पास; फिर भी फेल हुआ स्विच
By EditorialPublished on
अहमदाबाद एयर इंडिया हादसे की शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, विमान का थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल (TCM) बीते छह सालों में दो बार बदला गया था — पहली बार 2019 में और फिर 2023 में। इसके बावजूद विमान का फ्यूल स्विच फेल हो गया, जो हादसे की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
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एअर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान VT-ANB के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। विमान दुर्घटना की जांच कर रहे एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में इस विमान का थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल (TCM) दो बार बदला गया था। पहली बार यह बदलाव 2019 में किया गया था और दूसरी बार 2023 में।
TCM एक अत्यंत महत्वपूर्ण फ्लाइट सिस्टम है, जिसमें फ्यूल कंट्रोल स्विच भी शामिल होते हैं। ये स्विच इंजन को ईंधन की आपूर्ति नियंत्रित करने का कार्य करते हैं और उड़ान के दौरान इनका सही तरीके से काम करना बेहद आवश्यक होता है। लेकिन शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद अचानक यह फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गया, जिससे विमान में गंभीर तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई और अंततः वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
सूत्रों के मुताबिक, यह TCM बदलाव बोइंग द्वारा 2019 में जारी एक तकनीकी निर्देश के बाद किया गया था। एअर इंडिया ने निर्देश का पालन करते हुए दोनों बार यह मॉड्यूल बदला, लेकिन इसके बावजूद हादसे के वक्त फ्यूल कंट्रोल स्विच का फेल हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि TCM को बदलने और फ्यूल कंट्रोल स्विच के अचानक बंद हो जाने के बीच कोई सीधा तकनीकी संबंध नहीं पाया गया है। बावजूद इसके, जांच एजेंसी ने इसे जांच का केंद्रीय विषय बनाए रखा है।
इस बीच, एअर इंडिया हादसे की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPAI) ने आरोप लगाया है कि जांच की दिशा शुरुआत से ही पायलट की गलती की ओर इंगित कर रही है, जोकि पक्षपातपूर्ण रवैये की ओर इशारा करता है। संगठन ने कहा कि जब तक तकनीकी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच नहीं की जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुँचना गलत होगा।
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ALPAI ने जांच एजेंसियों से मांग की है कि इस मामले में केवल मानव त्रुटि को जिम्मेदार ठहराने के बजाय, सिस्टम फेल्योर और विमान के रखरखाव से जुड़े सभी तकनीकी बिंदुओं की गहराई से समीक्षा की जाए। संगठन का यह भी कहना है कि यह हादसा पायलट की गलती से नहीं, बल्कि तकनीकी प्रणाली की संभावित विफलता से हुआ हो सकता है।
फिलहाल AAIB द्वारा विस्तृत जांच जारी है और रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है। यह देखना बाकी है कि क्या जांच एजेंसी तकनीकी खामी को हादसे की मुख्य वजह मानती है या फिर अन्य कारकों को भी इसमें शामिल किया जाता है।

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