यौन उत्पीड़न पर चुप रहा प्रशासन; छात्रा ने दी जान!
ओडिशा के बालासोर जिले में एक बी.एड. छात्रा द्वारा आत्मदाह की कोशिश ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज में यौन उत्पीड़न की शिकायत पर कार्रवाई न होने से आहत छात्रा ने कॉलेज परिसर में खुद को आग लगा ली। इस घटना के बाद कॉलेज प्रिंसिपल दिलीप घोष और आरोपी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर समीर कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया गया है।
शिकायत दर्ज, फिर भी कार्रवाई नहीं :
छात्रा ने 1 जुलाई को प्रोफेसर साहू पर महीनों से यौन उत्पीड़न और धमकियों का आरोप लगाते हुए कॉलेज प्रशासन और पुलिस से शिकायत की थी। उसने एक लंबा पत्र लिखकर अपनी आपबीती कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति को सौंपी थी, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया। पत्र में राज्य के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और अन्य उच्च अधिकारियों को भी टैग किया गया था।
'सात दिन में कार्रवाई' का वादा, 12 दिन बाद आत्मदाह :
कॉलेज प्रशासन ने छात्रा से वादा किया था कि सात दिनों में कार्रवाई की जाएगी, लेकिन 12 दिन बीत जाने पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 11 जुलाई को पीड़ित छात्रा ने कॉलेज के गेट पर मिट्टी का तेल डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया। घटनास्थल का वीडियो सामने आया है जिसमें छात्रा आग की लपटों में कॉलेज भवन में दौड़ती नजर आ रही है।
अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई :
छात्रा को गंभीर हालत में AIIMS भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, वह 95 प्रतिशत तक जल चुकी है और जीवन रक्षक प्रणाली पर है। उसे बचाने की कोशिश करने वाले एक अन्य छात्र को भी 70 प्रतिशत जलने की चोटें आई हैं, जिसका इलाज जारी है।
प्रिंसिपल और प्रोफेसर गिरफ्तार, निलंबन के आदेश :
घटना के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। पुलिस ने प्रोफेसर साहू को गिरफ्तार किया है और उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया है। कॉलेज के प्रिंसिपल दिलीप घोष पर लापरवाही और शिकायतों की अनदेखी का आरोप है, जिसके चलते उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
परिवार पर दबाव, न्याय की गुहार :
छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहा था। उन्होंने कहा, “मुझसे कहा गया कि अगर शिकायत नहीं हटाई, तो मुझे गिरफ्तार किया जाएगा। आज मेरी बेटी अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है, और मैं उसे पहचान भी नहीं पा रहा हूं।”
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राजनीतिक प्रतिक्रिया और राष्ट्रपति से मुलाकात की मांग :
इस घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक बवाल भी तेज हो गया है। बीजू जनता दल और कांग्रेस दोनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का समय मांगा है, जो इस समय ओडिशा दौरे पर हैं। छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने पूरे राज्य में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं।
यह घटना न सिर्फ एक कॉलेज की आंतरिक विफलता को उजागर करती है, बल्कि उस प्रशासनिक उदासीनता की भी तस्वीर पेश करती है जो कई बार पीड़ितों को न्याय से वंचित कर देती है। अब सवाल यह है कि क्या इस बार जवाबदेही तय होगी, या एक और मामला सिर्फ जांचों और बयानों में दफ्न हो जाएगा?
Editorial

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