CM योगी का बड़ा आरोप; छांगुर बाबा कर रहा था जबरन धर्मांतरण
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 12 जुलाई को एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित ‘श्री तेग बहादुर संदेश यात्रा’ का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और यात्रा को शुभारंभ किया।
इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को सनातन धर्म की रक्षा का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह यात्रा न केवल उनके बलिदान की स्मृति है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और संघर्षों को जीवंत करने का एक प्रयास भी है।
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औरंगजेब का कालखंड – एक बर्बरता की याद
सीएम योगी ने अपने उद्बोधन में कहा, "वह कैसा कालखंड रहा होगा जब औरंगजेब जैसा क्रूर और बर्बर शासक सत्ता में था। उसका मकसद था – सनातन धर्म को समाप्त करना और इस्लामीकरण को थोपना। ऐसी स्थिति में सबसे पहले गुरु तेग बहादुर जी ने ही उसका विरोध किया और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी।"
अवैध धर्मांतरण पर सख्त रुख :
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में अवैध धर्मांतरण को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें योजनाबद्ध तरीके से समाज को तोड़ने और देश के स्वरूप को बदलने की साजिश कर रही हैं। "SC/ST समुदाय को लालच और भय दिखाकर धर्मांतरण कराने की कोशिश की जा रही है, जो न केवल संविधान के खिलाफ है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी गंभीर खतरा है। सरकार ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर रही है।"
उन्होंने बताया कि बलरामपुर में हाल ही में एक बड़े धर्मांतरण नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है, जिसमें 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन और 40 बैंक खातों की पहचान हुई है। इस नेटवर्क को विदेशों से फंडिंग हो रही थी, जिसे पूरी तरह से ध्वस्त किया जाएगा।
लखनऊ से दिल्ली तक संदेश यात्रा :
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि यह संदेश यात्रा लखनऊ से शुरू होकर दिल्ली के शीशगंज गुरुद्वारा तक जाएगी, जहां गुरु तेग बहादुर जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यात्रा का उद्देश्य 350 वर्षों के बलिदान और संघर्ष को आमजन तक पहुंचाना है।
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हिंदू-सिख एकता पर बल :
सीएम योगी ने कहा कि “हिंदू और सिखों के बीच फूट डालने के प्रयास होते रहेंगे, लेकिन हमें जागरूक रहना होगा। यह आयोजन गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनकी प्रेरणा को जिंदा रखने का एक अवसर है।”
वीर बाल दिवस और राष्ट्रीय आयोजन :
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में राष्ट्रीय मान्यता देने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि “आज गुरु परंपरा को देश और दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी हमारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी जाति या समुदाय अपनी संस्कृति और आस्था को छोड़ने के लिए मजबूर न हो।”
यह समाचार रिपोर्ट न केवल एक ऐतिहासिक यात्रा और श्रद्धांजलि का दस्तावेज है, बल्कि भारत में धर्म, आस्था और सामाजिक सुरक्षा को लेकर बढ़ती सजगता की झलक भी देती है।
Editorial

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