बिन बुलाये मेहमान बने मोदी; भगवंत मान का तीखा तंज
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विदेश नीति पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति का मकसद सिर्फ प्रचार करना रह गया है, न कि देशहित में ठोस कूटनीतिक फैसले लेना।
पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर तंज :
भगवंत मान ने कहा कि प्रधानमंत्री ऐसे देशों का दौरा कर रहे हैं, जिनके बारे में देश के लोग शायद ही जानते हों। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि जब प्रधानमंत्री दो देशों के बीच युद्ध रोक सकते हैं तो फिर पंजाब और हरियाणा के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद को क्यों नहीं सुलझा पा रहे? उनका कहना था कि भारत की विदेश और घरेलू नीति में संतुलन की कमी साफ नजर आती है।
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक पाकिस्तान दौरे का जिक्र करते हुए भगवंत मान ने तंज कसा कि आम लोग तो पाकिस्तान जा ही नहीं सकते, लेकिन प्रधानमंत्री बिना बुलाए वहां बिरयानी खाने पहुंच जाते हैं।
विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब :
भगवंत मान की इस टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने मान के बयान को "गैरजिम्मेदाराना और खेदजनक" करार दिया। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत की विदेश नीति गहराई और सोच-समझ के साथ बनाई जाती है, ना कि किसी के मजाक या आलोचना से प्रभावित होकर।
दिलजीत दोसांझ की फिल्म पर भी बोले मान :
सिर्फ विदेश नीति ही नहीं, भगवंत मान ने हाल ही में दिलजीत दोसांझ की फिल्म को लेकर उठे विवाद पर भी अपनी राय रखी। इस फिल्म में एक पाकिस्तानी अभिनेता के काम करने को लेकर सोशल मीडिया पर दिलजीत पर सवाल उठे थे। मान ने साफ कहा कि यह फिल्म पहले ही बन चुकी थी और इसे गद्दारी से जोड़ना गलत है। उन्होंने कहा कि कभी दिलजीत को "गद्दार" कहा जाता है और कभी "सरदार", यह दोहरा रवैया समाज में भ्रम पैदा करता है। भगवंत मान ने यह भी कहा कि कला और राजनीति को अलग रखा जाना चाहिए। कलाकार जहां भी काम करें, उनकी कला का सम्मान होना चाहिए, इसे देशभक्ति या गद्दारी से जोड़ना ठीक नहीं।
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राजनीतिक बहस तेज :
भगवंत मान के इन तीखे हमलों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां सरकार इसे गैरजिम्मेदाराना बयान बता रही है, वहीं मान का दावा है कि वह जनता के सवाल उठा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह बहस किस दिशा में जाती है और क्या केंद्र सरकार इन सवालों का कोई जवाब देती है।
Editorial

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