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मुंबई। आषाढ़ी पूनम और गुरु पूर्णिमा पर जैन स्थानक पनवेल में आयोजित धर्मसभा में श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने श्रद्धालुओं को गुरु महिमा और साधना का महत्व बताया।उन्होंने कहा कि जैसे किसान खेत में बीज बोकर जीवन का आधार तैयार करता है, वैसे ही साधक चातुर्मास में साधना का बीज बोकर आत्मा को जागृत करता है। उन्होंने कहा अगर खेत में बीज न बोएं तो जीवन रुक जाता है और अगर धर्म और साधना का बीज न बोया जाए तो संस्कृति नष्ट हो जाती है। अज्ञानी व्यक्ति भौतिक सुखों के मोह में भव (जन्म-मरण) का बीज बोता रहता है। लेकिन जो गुरु के मार्गदर्शन में साधना करता है, वह बोधी बीज बोकर जन्म-मरण से मुक्त हो सकता है।
गुरु पूर्णिमा पर उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन दिशा हीन होता है। पत्थर को पारस ही सोना बना सकता है, वैसे ही गुरु साधक के व्यक्तित्व को आकार देते हैं। समर्पण और विनय से ही गुरु तत्व की प्राप्ति होती है। गुरु के आशीर्वाद से ही साधना सफल होती है और आत्मा की उन्नति होती है।
हितेंद्र ऋषि व धवल ऋषि ने भी धर्मसभा मे विचार व्यक्त कियें। चातुर्मास समिति के शैलेन्द्र खैरोदिया व राजेंद्र बांठिया ने बताया कि धर्मसभा में पारस छाजेड़, रोशनलाल पगारिया, सुरेश सोनी, नमीचंद छाजेड़, महेंद्र पंगारिया, श्याम काकरेचा, शोकिन पामेचा, दिलीप पंगारिया, रोहित छाजेड़, संजय बोहरा, मेवाड़ महिला मंडल प्रमुख ललिता सोनी खुशी पंगारिया, कविता पामेचा आदि मौजूद रहे। संचालन रणजीत काकरेचा ने किया।
Editorial

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