यमन में फांसी की सजा; सुप्रीम कोर्ट में बचाने की आखिरी जंग
केरल की रहने वाली 38 वर्षीय भारतीय नर्स निमिषा प्रिया यमन में मौत की सजा का सामना कर रही हैं। खबर है कि 16 जुलाई को उन्हें फांसी दी जा सकती है। इस गंभीर मामले में भारतीय सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर केंद्र सरकार से राजनयिक स्तर पर दखल देने की मांग की गई है ताकि निमिषा प्रिया की जान बचाई जा सके।
गुरुवार, 10 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जे. बागची की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए इसे 14 जुलाई को लिस्ट कर दिया है।
वकील ने बताया- ब्लड मनी ही आखिरी रास्ता :
मामले में याचिकाकर्ता एडवोकेट सुभाष चंद्रन के.आर. और सीनियर एडवोकेट रजेंथ बसंत ने कोर्ट में दलील दी कि यमन में लागू शरिया कानून के तहत मृतक के परिवार को 'ब्लड मनी' देकर क्षमा मांगी जा सकती है। ब्लड मनी एक तरह का आर्थिक मुआवजा होता है, जिसे दोषी व्यक्ति मृतक के परिवार को देता है, और इसके बाद परिवार यदि चाहे तो दोषी को क्षमा कर सकता है।
वकीलों का कहना है कि इस मामले में यदि जल्द से जल्द ब्लड मनी के जरिए समझौता कराया जाता है तो निमिषा प्रिया की फांसी टल सकती है। इसलिए केंद्र सरकार को तुरंत राजनयिक स्तर पर बातचीत शुरू करनी चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र से मांगी अटॉर्नी जनरल की सहायता :
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील से कहा कि वे इस याचिका की एक कॉपी अटॉर्नी जनरल को दें ताकि केंद्र सरकार की तरफ से जरूरी कदम उठाए जा सकें। अदालत ने साफ किया कि यह मामला बेहद गंभीर और मानवीय है, और इसमें केंद्र की भूमिका अहम हो सकती है।
यह याचिका 'सेव निमिषा प्रिया - इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' नामक संगठन की ओर से दाखिल की गई है। यह संगठन पिछले कई सालों से निमिषा प्रिया के लिए कानूनी और सामाजिक स्तर पर मदद कर रहा है।
2017 में बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप :
निमिषा प्रिया के खिलाफ मामला 2017 में दर्ज हुआ था, जब उन पर अपने यमनी बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप लगा। 2020 में यमन की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई और 2023 में उनकी अंतिम अपील भी खारिज कर दी गई। वर्तमान में वे यमन की राजधानी सना की एक जेल में बंद हैं।
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मौत की तारीख तय :
याचिका में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया है कि यमन के प्रशासन ने 16 जुलाई को फांसी की तारीख के तौर पर तय किया है। ऐसे में भारत सरकार के पास राजनयिक माध्यमों से इस सजा को रोकने के लिए बहुत कम वक्त बचा है।
क्या भारत सरकार उठाएगी ठोस कदम ?
अब देखना यह होगा कि भारत सरकार राजनयिक स्तर पर क्या प्रयास करती है और क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद निमिषा प्रिया की जिंदगी बचाई जा सकेगी या नहीं।
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