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मॉस्को पर दबाव या भारत पर वार; ट्रंप की ट्रेड चाल से हलचल
By EditorialPublished on
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर अपना आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। जहां ब्राजील पर 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाया जा चुका है, वहीं अब ट्रंप प्रशासन रूस को घेरने के लिए भारत पर 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि भारत को इस ट्रेड वॉर में मोहरा बनाकर अमेरिका, मॉस्को पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार उन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहे हैं, जो अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। हाल ही में ब्रिक्स समूह के सदस्य ब्राजील पर 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाने के बाद अब भारत और चीन पर भी सख्त कदम उठाने के संकेत मिले हैं।
रूस के खिलाफ नई रणनीति :
दरअसल, ट्रंप प्रशासन रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए भारत और चीन को निशाना बना सकता है। अमेरिका के सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किए गए ‘Sanctioning Russia Act 2025’ के तहत यह प्रावधान है कि जो देश रूस से तेल, गैस, यूरेनियम या पेट्रोलियम उत्पाद खरीदेंगे, उन पर अमेरिका 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा सकता है।
कैबिनेट बैठक में ट्रंप के संकेत :
राष्ट्रपति ट्रंप ने कैबिनेट बैठक में कहा कि वह इस प्रस्तावित कानून पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून को लागू करना या न करना उनके विकल्प में है। ट्रंप प्रशासन की रणनीति साफ है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव डालने के लिए उनके व्यापारिक साझेदारों पर आर्थिक चोट पहुंचाई जाए।
भारत-चीन क्यों बने निशाना ?
भारत और चीन रूस के सबसे बड़े तेल और ऊर्जा उत्पाद खरीदार हैं। माना जाता है कि रूस अपने कुल तेल निर्यात का करीब 70 प्रतिशत इन दोनों देशों को बेचता है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का तर्क है कि अगर कोई देश रूस से व्यापार कर रहा है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन की मदद नहीं कर रहा है। इसलिए उन पर सख्त आर्थिक दंड लगाया जाना चाहिए।
ट्रंप की वैश्विक टैरिफ वार :
अमेरिका ने हाल ही में ब्राजील, ब्रुनेई, फिलीपिंस, अल्जीरिया, मोल्दोवा, इराक, लीबिया और श्रीलंका जैसे देशों पर भी भारी टैरिफ लगाया है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाजार में फिर से अनिश्चितता और तनाव की स्थिति बन गई है।
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क्या भारत तैयार है ?
भारत के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है। एक तरफ रूस से सस्ते तेल और गैस की आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है, दूसरी ओर अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर से भारत के वैश्विक कारोबार पर असर पड़ सकता है। अब सबकी नजरें ट्रंप प्रशासन के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। अगर 500 प्रतिशत का टैरिफ लागू होता है तो भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में बड़ा तनाव आ सकता है और रूस पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा।

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