वाणिज्य प्रबंधकों (PCCM) का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन

मुंबई, 10 जुलाई 2025।
भारतीय रेलवे के सभी 17 ज़ोन के प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधकों (PCCM) का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 7 और 8 जुलाई 2025 को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) स्थित ऐतिहासिक हेरिटेज भवन में सफलता पूर्वक आयोजित किया गया। यह सम्मेलन रेलवे की वाणिज्यिक गतिविधियों, ग्राहक सेवा सुधार और डिजिटल पहल के संदर्भ में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श का मंच बना।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में रेलवे बोर्ड के सदस्य (संचालन एवं व्यवसाय विकास), अतिरिक्त सदस्य (वाणिज्य), अतिरिक्त सदस्य (पर्यटन एवं खानपान), कार्यकारी निदेशकगण एवं रेलवे बोर्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही सीआरआईएस (रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र), आईआरसीटीसी (भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम) और कोंकण रेलवे (KRCL) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज की।


सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय रेलवे की वाणिज्यिक रणनीतियों को और अधिक सशक्त बनाना और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करना था। इसमें यात्री एवं मालवहन सेवाओं में वृद्धि, राजस्व में इजाफा, स्टेशन एवं टर्मिनल प्रबंधन, और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से यात्री अनुभव को बेहतर बनाने जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।


सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत विभिन्न सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर विशेष रूप से फोकस किया गया:

  • टिकट प्रणाली में नवाचार और इसे अधिक सुगम व पारदर्शी बनाने के उपाय

  • मूल्यवर्धित सेवाओं के माध्यम से यात्रियों को अतिरिक्त लाभ प्रदान करना

  • पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रेलवे की भूमिका और योजनाएं

  • ग्राहक शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाना

  • सेवाओं को निर्बाध बनाने हेतु तकनीकी सुधार और डिजिटल परिवर्तन


सम्मेलन के माध्यम से यह भी स्पष्ट हुआ कि भारतीय रेलवे अपने वाणिज्यिक दृष्टिकोण को न केवल राजस्व केंद्रित, बल्कि ग्राहक केंद्रित भी बना रही है। रेलवे का ध्यान अब सेवा की गुणवत्ता, समयबद्धता, डिजिटल समाधान और पारदर्शिता पर केंद्रित है, जिससे यात्री और मालवहन ग्राहक दोनों को लाभ हो।


कार्यक्रम के अंत में रेलवे बोर्ड और ज़ोनल अधिकारियों ने संयुक्त रूप से इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य की रेलवे प्रणाली अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और यात्री-अनुकूल होगी। भारतीय रेलवे के वाणिज्यिक और परिचालन क्षेत्रों में यह सम्मेलन एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो देश की रेल प्रणाली को आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।


Editorial

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