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मुंबई। चातुर्मासिक चौदस पर शासनश्री साध्वी कंचनप्रभा ने कहा कि मर्यादित, अनुशासित जीवन आत्म अस्तित्व की पहचान कराता है। वह व्यक्ति भाग्यशाली है जिनको गुरु चरणों का अनुशासन मिला। आचार्य भिक्षु ने धर्म संघ की दीर्घजीविता के लिए विविध मर्यादाओं के निर्माण से साधना के सूत्र प्रदान किए। शासनश्री साध्वी मंजुरेखा ने कहाकि तेरापंथ का गौरव है मर्यादा और अनुशासन। इसी के आधार पर आज तेरापंथ नये युग में प्रवेश कर चुका है। क्योंकि कितना ही भौतिक विकास हो जाए मगर अध्यात्म की संस्कृति ही व्यक्तित्व का निर्माण कर सकती हैl साध्वी मंजुरेखा, उदितप्रभा, निर्भयप्रभा व चेलनाश्री ने गीत का संगान किया।
Editorial

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