Statehood Non-Negotiable; Chaudhary Speaks Out
जम्मू-कश्मीर में बाबा अमरनाथ यात्रा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। पूरे प्रशासनिक तंत्र के साथ राज्य के शीर्ष नेता भी इस पवित्र यात्रा की व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्र शासित प्रदेश के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने न केवल यात्रा को “पर्व” बताया, बल्कि जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे पर भी बड़ा बयान दे डाला।

“स्टेट लेकर रहेंगे, छीन कर रहेंगे” – सुरिंदर चौधरी
सोनमर्ग में अमरनाथ यात्रा की तैयारियों का निरीक्षण करते हुए मीडिया से बातचीत में डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने कहा,"स्टेट लेकर रहेंगे, छीन कर रहेंगे, बिल्कुल नहीं रुकेंगे, और बोलो..." यह कहते हुए वे कैमरे पर मुस्कुराए, लेकिन उनका संदेश साफ था – जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिलाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
अमरनाथ यात्रा को बताया भाईचारे का प्रतीक :
अमरनाथ यात्रा को लेकर चौधरी ने कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है। “यह यात्रा बाबा बर्फानी की है, जिसे हमारे बुजुर्गों ने शुरू किया था। इसका बेस कैंप जम्मू में है और पवित्र गुफा कश्मीर में – यही इस यात्रा की खूबसूरती है,” उन्होंने कहा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह भाईचारे और अतिथि-संस्कार की मिसाल है, और यही भावना जम्मू-कश्मीर की असली पहचान है।
BRO के कार्य की तारीफ :
डिप्टी सीएम ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की भी जमकर सराहना की। उन्होंने बताया कि यात्रा ट्रैक के पुनर्निर्माण का कार्य बहुत ही तेजी और गुणवत्ता के साथ हुआ है। “कश्मीर में कार्य दिवस सीमित होते हैं, इसलिए BRO ने जिस तत्परता से ट्रैक का काम पूरा किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है,” उन्होंने कहा। साथ ही यह भी भरोसा जताया कि भविष्य में ऐसे ट्रैक भी तैयार किए जाएंगे जिससे बुजुर्ग श्रद्धालु भी आसानी से बाबा अमरनाथ के दर्शन कर सकें।

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3 जुलाई से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा :
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो रही है और सरकार इसे लेकर पूरी तरह से सजग और तैयार है। यात्रा को सुचारू, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी के बयान से साफ है कि जम्मू-कश्मीर की संस्कृति, आस्था और राजनीतिक भविष्य – तीनों ही मुद्दों को सरकार बेहद गंभीरता से ले रही है। अमरनाथ यात्रा जहां धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, वहीं राज्य का दर्जा एक भावनात्मक और संवैधानिक मुद्दा बनकर फिर से चर्चा में आ गया है।
Editorial

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