Mumbai
मुंबई। मुलुंड-भांडुप, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, वसई सहित मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में बिजली आपूर्ति का एकाधिकार रखने वाली राज्य सरकार की महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) को अब टाटा पावर के साथ-साथ अडानी और टॉरेंट पावर से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। टाटा पावर की ओर से हाल ही में समानांतर वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है, जबकि अडानी इलेक्ट्रिसिटी नवी मुंबई लि. (एईएनएमएल) और टॉरेंट पावर ने भी एमएमआर क्षेत्र में लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। इन आवेदनों पर एमईआरसी द्वारा 22 जुलाई को जनसुनवाई की जाएगी। एईएनएमएल, अडानी एनर्जी सॉल्यूशन्स की एक सहायक कंपनी है, जो मुलुंड, भांडुप, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल, खारघर, तलोजा और उरण में बिजली वितरित करने की योजना के तहत पांच वर्षों में रु.5,700 करोड़ का निवेश कर वितरण नेटवर्क स्थापित करेगी।
टॉरेंट पावर की योजना वसई-विरार क्षेत्र, कल्याण-डोंबिवली के नगर क्षेत्र, उल्हासनगर, ठाणे (फ्रेंचायज़ी क्षेत्रों को छोड़कर), अंबरनाथ और पालघर में वितरण कार्य करना है। सूत्रों के अनुसार, एईएनएमएल लगभग पाँच लाख और टॉरेंट पावर छह लाख उपभोक्ताओं को अगले पाँच वर्षों में जोड़ने का लक्ष्य रखती है। विशेषज्ञों ने बताया कि इनमें अधिकांश नए उपभोक्ता होंगे, लेकिन यह संभावना भी बनी रहती है कि वर्तमान में सब्सिडी देने वाले कुछ उपभोक्ता निजी कंपनियों की ओर स्थानांतरित हो सकते हैं।
बिजली विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे ‘सब्सिडाइजिंग’ उपभोक्ताओं में उद्योग और वाणिज्यिक वर्गों के साथ-साथ वे घरेलू उपभोक्ता शामिल होते हैं जिनकी मासिक खपत 300 यूनिट से अधिक होती है। एक विशेषज्ञ ने बताया कि सब्सिडी पाने वाले निचले वर्ग के उपभोक्ता एमएसईडीसीएल के साथ बने रह सकते हैं, लेकिन उच्च श्रेणी वाले उपभोक्ता यदि प्रतिस्पर्धी दर उपलब्ध हो तो स्विच कर सकते हैं।
बिजली विशेषज्ञ अशोक पेंडसे के अनुसार उपभोक्ताओं की अपेक्षाएं मुख्यतः तीन बातों पर निर्भर होती हैं। टैरिफ मौजूदा बिजली कंपनी की तुलना में प्रतिस्पर्धी या कम हो, एमएसईडीसीएल की तरह बार-बार होने वाले मेंटेनेंस शटडाउन या पावर कट्स की बजाय 24x7 भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित हो, और बेहतर ग्राहक सेवा, वह भी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से। पूर्व में एमएसईडीसीएल यूनियनों ने अडानी समूह के प्रवेश का विरोध किया था। सूत्रों के अनुसार, इस बार भी यूनियन या कार्यकर्ता वर्ग द्वारा इसका विरोध होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Editorial

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