इंडिया गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई उस चिट्ठी पर इन दिनों सियासी हलचल तेज है, जिसमें संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की गई थी। खास बात यह रही कि इस अहम चिट्ठी पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार के हस्ताक्षर नहीं थे, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। अब इस पूरे मामले पर शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने चुप्पी तोड़ते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि शरद पवार का साइन न करना किसी मतभेद का संकेत नहीं, बल्कि इसके पीछे ए


INDIA गठबंधन में शरद पवार के सिग्नेचर से गायब चिट्ठी; सुप्रिया सुले का बयान
ऑपरेशन सिंदूर और सीमा पर जारी तनाव के बीच विपक्षी गठबंधन INDIA ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी भेजी है। इस चिट्ठी पर कांग्रेस समेत कुल 16 विपक्षी दलों के नेताओं के हस्ताक्षर हैं, लेकिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) इस पहल से अलग नजर आई। खासकर शरद पवार का इस चिट्ठी से दूर रहना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। इसे INDIA गठबंधन के लिए झटका माना जा रहा था। अब इस पर शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने बड़ा बयान देकर स्थिति को साफ करने की कोशिश की है।
“देश पहले, फिर राजनीति” – सुप्रिया सुले :
सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्होंने खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से अनुरोध किया था कि इस चिट्ठी को फिलहाल थोड़ा टाल दिया जाए, क्योंकि देश की सुरक्षा और सैन्य कार्रवाई के समय विपक्ष की ओर से सत्र की मांग एक टकराव की स्थिति पैदा कर सकती थी। उन्होंने कहा, "हम इंडिया गठबंधन के साथ हैं, लेकिन इस समय संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग को थोड़े वक्त के लिए टालना ही समझदारी थी। एक ओर हम सरकार के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन कर रहे हैं, और दूसरी ओर उसी सरकार से सवाल भी कर रहे हैं, तो यह गलत संदेश जा सकता था।"
सुले ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का INDIA गठबंधन से अलग होने से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दोहराया कि शरद पवार हमेशा यह मानते हैं कि “देश पहले आता है”, और इसी सोच के तहत एनसीपी (एसपी) ने इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर नहीं किए।
राहुल गांधी के बयान पर जवाब :
सुप्रिया सुले से जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी के "सरेंडर" वाले बयान पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "मैंने उनका पूरा बयान नहीं सुना है, लेकिन इतना कह सकती हूं कि दुनिया भर में भारत की डि-एस्केलेशन प्रक्रिया की सराहना की जा रही है। हम सभी विपक्षी नेता देश के साथ खड़े हैं।"
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष :
सुप्रिया सुले हाल ही में सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ विदेश दौरे पर गई थीं, जहां उन्होंने भारत के खिलाफ पाकिस्तान की साजिशों को उजागर किया। उन्होंने बताया कि "हम सात सांसदों के समूह ने साउथ अफ्रीका, इथोपिया, इजिप्ट और कतर में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखा। इन देशों ने आतंक के खिलाफ भारत के संघर्ष का समर्थन किया और पहलगाम आतंकी हमले की आलोचना की।"
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राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश :
सुप्रिया सुले के इस बयान को राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। शरद पवार की चुप्पी पर उठ रहे सवालों के बीच यह सफाई यह संदेश देने की कोशिश है कि NCP (SP) अब भी विपक्षी मोर्चे का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के मसलों पर वह राजनीति से ऊपर उठकर सोचती है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर विपक्ष के भीतर नीतिगत मतभेदों और रणनीतिक असहमति को उजागर कर दिया है। वहीं सुप्रिया सुले का बयान यह भी दर्शाता है कि शरद पवार फिलहाल सधी हुई राजनीतिक लाइन पर चल रहे हैं।
Editorial

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