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पाकिस्तान की बड़ी चूक; PoK की वापसी अब दूर नहीं!
By EditorialPublished on
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा शिमला समझौते को “Dead Document” करार देने के बाद एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। उनके इस बयान ने भारत को कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान के बाद भारत के पास अब चुंब सेक्टर समेत PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) पर फिर से वैध दावा करने और कार्रवाई की राह खुल गई है। दशकों पुराना यह विवाद एक नए मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जहां पाकिस्तान की एक चूक, भारत के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है।

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भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। चार दिनों तक चले संघर्ष और भारत द्वारा पाकिस्तान में मौजूद आतंकी अड्डों को तबाह करने के बाद अब पाकिस्तान की ओर से एक ऐसा बयान आया है, जिसने एक बार फिर PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) को लेकर भारत की स्थिति मजबूत कर दी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में 1972 के शिमला समझौते को "Dead Document" करार देते हुए कहा कि अब भारत-पाक संबंधों में यह समझौता कोई भूमिका नहीं निभाता।
शिमला समझौते की अनदेखी – पाकिस्तान की बड़ी चूक ?
ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब भारत और पाकिस्तान के बीच पुरानी स्थिति बहाल हो चुकी है और Line of Control को अब Ceasefire Line माना जाना चाहिए। यह बयान भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि 1972 का शिमला समझौता ही वह आधार था, जिसके तहत भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले चुंब सेक्टर को छोड़ा था। इस समझौते के समाप्त होने की घोषणा के बाद भारत के पास अब इस क्षेत्र पर दोबारा दावा करने का पूरा नैतिक और वैधानिक आधार बन गया है।
चुंब सेक्टर: भारत की सुरक्षा के लिए अहम :
चुंब सेक्टर, जिसे पाकिस्तान ने 1971 युद्ध के दौरान कब्जे में लेकर ‘इफ्तिकाराबाद’ नाम दे दिया था, भारत के लिए सामरिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। 1949 के सीजफायर एग्रीमेंट के अनुसार यह क्षेत्र भारत का हिस्सा था। 1965 के युद्ध में पाकिस्तान ने इस पर कब्जा कर लिया था, लेकिन भारत ने फिर से इसे अपने नियंत्रण में लिया। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान ने एक बार फिर इस पर नियंत्रण पा लिया और शिमला समझौते के तहत इसे अपने पास बनाए रखा।
इस क्षेत्र में कभी भारत के नागरिक बसते थे, जो 1971 के बाद पलायन कर गए। अब जब पाकिस्तान ने खुद ही शिमला समझौते को खत्म घोषित कर दिया है, तो भारत के पास इसे वापस लेने का पूर्ण नैतिक और रणनीतिक अधिकार है।
सिंधु जल समझौते पर भी भारत की सख्ती :
22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को रोक दिया था, जिसे पाकिस्तान ने उस समय शिमला समझौते की अस्थायी निलंबना के रूप में देखा था। लेकिन अब जब पाकिस्तान खुद कह रहा है कि यह समझौता पूरी तरह से खत्म हो गया है, तो भारत के लिए PoK को लेकर पुराने दावे फिर से मजबूत होते दिख रहे हैं।
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क्या अब PoK पर भारत का अगला कदम ?
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह चूक, भारत के लिए रणनीतिक लाभ का बड़ा अवसर है। शिमला समझौते के खत्म होने के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर PoK की वापसी का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठा सकता है, और यदि आवश्यक हुआ तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला है।
भारत के लिए यह वक्त निर्णायक साबित हो सकता है – जब इतिहास को पलटने और अपने खोए हुए भूभाग को फिर से हासिल करने का अवसर बन रहा है। पाकिस्तान की 'Dead Document' घोषणा खुद उसके लिए एक बड़ा आत्मघाती कदम साबित हो सकती है।

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