GST में 12% की छूट; इन चीजों पर पड़ेगा सीधा असर
जीएसटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब को खत्म करने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक जून या जुलाई 2025 में होने की संभावना है, जिसमें इस अहम प्रस्ताव पर फैसला लिया जा सकता है।
क्यों हो रहा है 12% टैक्स स्लैब खत्म ?
इस कदम का उद्देश्य जीएसटी रेट स्ट्रक्चर को सरल बनाना है। वर्तमान में देश में चार टैक्स स्लैब – 5%, 12%, 18% और 28% – लागू हैं। सरकार अब इसे तीन स्लैब में सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कई विशेषज्ञों और जीएसटी काउंसिल के सलाहकार अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को समर्थन भी दे दिया है। माना जा रहा है कि 12% स्लैब अब अप्रासंगिक हो चुका है, और इसे हटाकर सिस्टम को ज्यादा सुगम और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा सकता है।

क्या होगा असर ?
12% स्लैब में आने वाली चीजों को 5% या 18% स्लैब में शिफ्ट किया जा सकता है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर होगा
सस्ती हो सकती हैं ये चीजें (अगर 5% में गईं) :
  • फ्रूट जूस
  • कंडेन्स्ड मिल्क
  • नमकीन और मसाले
  • पेंसिल, छाते
  • पास्ता और कुछ फ्रोजन फूड
महंगी हो सकती हैं ये चीजें (अगर 18% में गईं) :
  • कॉन्टैक्ट लेंस
  • वॉकी-टॉकी
  • कारपेट
  • डिटर्जेंट
  • प्लास्टिक के घरेलू सामान
अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड के करीब पहुंचने की कोशिश :
दुनिया के कई देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, यूएई, कनाडा और सिंगापुर में सिर्फ एक या दो टैक्स स्लैब होते हैं। ऐसे में भारत अगर अपने स्लैब सिस्टम को कम करता है, तो जीएसटी व्यवस्था ग्लोबल स्टैंडर्ड के करीब पहुंचेगी। इसके साथ ही, रेवेन्यू में लगातार आ रही स्थिरता भी सरकार को यह फैसला लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
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पिछली बैठक कब हुई थी ?
जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक दिसंबर 2024 में हुई थी। अब जून या जुलाई 2025 में होने वाली बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला आम आदमी की जेब और बाजार की कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है।
अगर यह प्रस्ताव पारित होता है, तो कुछ चीजें सस्ती और कुछ महंगी हो सकती हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह होगी कि जीएसटी प्रणाली सरल और पारदर्शी बन जाएगी। अब देखना यह है कि सरकार इस दिशा में कितना आगे बढ़ती है।
Editorial

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