गर्मी से परेशान महिलाओं ने बीजेपी नेता को कीचड़ से नहलाया, मांगी बारिश...
बारिश न होने से झुलसा देने वाली गर्मी और सूखते खेतों के बीच उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवा कस्बे में महिलाओं ने एक अनोखा और सदियों पुराना टोटका अपनाया। उन्होंने अपने क्षेत्र में बारिश लाने के लिए नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता गुड्डू खान को कीचड़ से नहला दिया। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।


महाराजगंज (उत्तर प्रदेश), जून 2025 : बारिश न होने से झुलसा देने वाली गर्मी और सूखते खेतों के बीच उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवा कस्बे में महिलाओं ने एक अनोखा और सदियों पुराना टोटका अपनाया। उन्होंने अपने क्षेत्र में बारिश लाने के लिए नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता गुड्डू खान को कीचड़ से नहला दिया। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
भीषण गर्मी ने किया जनजीवन बेहाल
महाराजगंज जिले में पिछले कई दिनों से बारिश नहीं हुई है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है और क्षेत्र के ग्रामीण हिस्सों में जल संकट गहराने लगा है। खेतों में फसलें सूखने की कगार पर हैं और किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिखाई दे रही हैं।
पुरानी परंपरा का हुआ पुनरावृत्ति
ऐसे संकट के समय में नौतनवा की महिलाओं ने एक पुरानी मान्यता को पुनर्जीवित किया। परंपरा के अनुसार, अगर गाँव या कस्बे के किसी प्रमुख व्यक्ति या मुखिया को कीचड़ और पानी से नहलाया जाए, तो वर्षा के देवता इंद्रदेव प्रसन्न होकर बारिश बरसाते हैं। इसी परंपरा को मानते हुए महिलाओं ने भाजपा नेता गुड्डू खान को इस टोटके के लिए चुना।
कैसे हुई पूरी घटना
स्थानीय महिलाओं ने कजरी गीत गाते हुए समूह बनाकर गुड्डू खान के घर की ओर रुख किया। गीतों के माध्यम से वे इंद्रदेव से वर्षा की प्रार्थना करती रहीं। गुड्डू खान के आवास पहुंचकर उन्होंने उनका हाथ-पैर रस्सियों से हल्के रूप से बाँधा और उन्हें ज़मीन पर लिटा कर कीचड़ और पानी से नहलाया। वहीं अन्य महिलाएं कजरी गीतों के माध्यम से इस अनुष्� ान में शामिल रहीं।
इस पूरे कार्यक्रम को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बताते हुए महिलाओं ने कहा कि "हमारा उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, बल्कि इंद्रदेव को प्रसन्न कर बारिश बुलाने की यह एक पुरानी लोकपद्धति है।"
बीजेपी नेता ने दिखाई सहमति
पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष गुड्डू खान ने भी इस पूरे आयोजन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा। उन्होंने कहा,
"हमारी माताएं-बहनें परंपराओं को मानती हैं और संकट की घड़ी में कोई भी रास्ता अपनाने को तैयार रहती हैं। मैंने भी गांव की भलाई के लिए खुद को उनके विश्वास के साथ जोड़ दिया। अगर इससे इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और बारिश होती है, तो मैं सौ बार तैयार हूँ।"
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। कुछ लोग इसे अंधविश्वास बता रहे हैं तो कुछ इसे लोक परंपरा और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक कह रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परंपराएं विज्ञान से परे जरूर हैं लेकिन स्थानीय समाज में इनके गहरे धार्मिक और भावनात्मक मायने होते हैं।
अंतिम बात
जहां एक ओर विज्ञान और तकनीक की दुनिया तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और कस्बाई भारत में आज भी लोक मान्यताएं गहरे तक जड़ें जमाए हुए हैं। बारिश लाने के लिए महिलाओं का यह प्रयास आधुनिकता और परंपरा के बीच के संतुलन की एक झलक है ? जहाँ आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता भी देखने को मिलती है।

