भारत ने दिखाई सख्ती; ट्रेड डील में अमेरिका को माननी होंगी शर्तें!
भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील को लेकर हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया था। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौता जल्द ही हो सकता है और इसकी स्थिति आठ जुलाई तक पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। इसी सिलसिले में भारत सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आ गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील पर अपनी बात रखते हुए साफ कहा है कि भारत एक अच्छा समझौता जरूर करना चाहेगा, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी होंगी।
सीतारमण ने कहा कि भारत के लिए कृषि और डेयरी सेक्टर बेहद संवेदनशील क्षेत्र हैं और इन पर पहले से कुछ तय सीमाएं हैं। इन सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ही किसी भी प्रकार का अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौता किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था की रक्षा करते हुए ही वैश्विक साझेदारियों की ओर आगे बढ़ेगा।
ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि हां, भारत अमेरिका के साथ एक अच्छा व्यापारिक समझौता करना चाहेगा। लेकिन यह समझौता भारत के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत मजबूत अर्थव्यवस्थाओं के साथ रिश्ते बनाना चाहता है, ताकि आर्थिक मोर्चे पर देश को और मजबूती मिल सके।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों में व्यापारिक रुकावटें दूर की जा रही हैं और जल्द ही सभी मतभेद सुलझ सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि आठ जुलाई तक डील की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। हालांकि, भारत की ओर से अब तक कोई औपचारिक समझौता घोषित नहीं किया गया है।
सीतारमण ने एक इंटरव्यू में यह भी बताया कि भारत इस समय जिस आर्थिक चरण में है, उसमें ऐसी साझेदारियां बेहद महत्वपूर्ण हो जाती हैं। उनका कहना था कि अगर भारत मजबूत अर्थव्यवस्थाओं के साथ जल्द से जल्द व्यापारिक समझौते करता है, तो यह उसके विकास के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत हर संभावित डील को अपने हितों के अनुसार परखकर ही आगे बढ़ाएगा।
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गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव रहे हैं। कई बार टैरिफ, वीजा, टेक्नोलॉजी शेयरिंग जैसे मुद्दों पर दोनों देशों में मतभेद भी सामने आए हैं। लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अब दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है।
इस समय जब भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान मजबूत कर रहा है, अमेरिका के साथ एक संतुलित और लाभकारी ट्रेड डील उसके लिए न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम साबित हो सकती है।
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