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खुद को मौत का सौदागर बतानेवाला मसूद अजहर बना भगौड़ा...
By EditorialPublished on
जो कभी '72 हूरों' के ख्वाब बेचकर युवाओं को मौत की राह पर भेजता था, आज वही खूंखार आतंकी मसूद अजहर खुद अपनी जान बचाने के लिए छिपता फिर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर की गूंज और भारत की जवाबी कार्रवाई के खौफ से अजहर ने पाकिस्तान छोड़ अफगानिस्तान की शरण ले ली है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, अजहर इस समय अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में लश्कर-ए-तैयबा के एक कैंप में छिपा है, जहां वह अपने बीमार शरीर और डरे हुए मन के साथ, कभी भारत के खिलाफ रचने वाली साजिशों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है। भारत की नई नीति चेतावनी नहीं, सीधी

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जो कभी कट्टरपंथ और 'शहादत' के नाम पर सैकड़ों युवाओं को मौत के रास्ते पर भेजता था, आज वही जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर खुद मौत के डर से भागता फिर रहा है। भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद न केवल आतंकी नेटवर्क बिखर रहे हैं, बल्कि उनके सरगना भी अब छिपने के लिए सुरक्षित जगहों की तलाश में हैं। इसी कड़ी में मसूद अजहर अब पाकिस्तान छोड़ अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में एक लश्कर-ए-तैयबा के ट्रेनिंग कैंप में छिपा हुआ बताया जा रहा है।
खुफिया एजेंसियों का खुलासा :
भारतीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, अजहर को अंदेशा है कि भारत एक बार फिर आतंकी ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई कर सकता है, जैसा उसने अतीत में बालाकोट और हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के तहत किया है। इस डर से अजहर ने अपने भाई मौलाना तल्हा आसिफ को साथ लेकर पाकिस्तान से भागने का फैसला लिया। अजहर की हालत पहले से ही गंभीर है – वह दिल की बीमारी से पीड़ित है और डॉक्टरों ने उसे बोलने तक से मना कर दिया है। वह गुपचुप तरीके से कराची से दवाइयां मंगाता है ताकि उसके स्थान का पता न चले।
ऑपरेशन सिंदूर की सीधी चोट :
बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर में अजहर के कई रिश्तेदार मारे गए थे, जिसके बाद से वह पूरी तरह भयभीत है। पहले जिस भारत को वह चुनौती देता था, अब उसी भारत की सर्जिकल स्ट्राइक नीति ने उसे एक जगह टिककर जीने नहीं दिया। अब वह अफगानिस्तान के आतंकी शिविरों में दबी छाया की तरह रह रहा है और आतंकी कैंपों की जिम्मेदारी अपने भाई तल्हा को सौंप चुका है।
तालिबान की 'नजरअंदाजी', दोस्ती काम आई :
हालांकि अफगान तालिबान सरकार यह दावा करती है कि वह किसी आतंकी को पनाह नहीं देती, लेकिन हकीकत यह है कि तालिबान के कई पुराने कमांडर अब भी जैश, लश्कर और अलकायदा से संपर्क में हैं। इसी के चलते न केवल मसूद अजहर बल्कि लश्कर-ए-गजवात-उल-हिंद के शीर्ष आतंकी डॉ. अब्दुल रऊफ ने भी अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में एक ट्रेनिंग सेंटर में अपना ठिकाना बना लिया है।
अब खुद की जान के लिए दर-दर की ठोकरें :
जो आतंकी कभी माइक पर खड़े होकर '72 हूरों' की बातें करता था, आज वो अपनी जान बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। कभी जिसे अपने कार्यकर्ताओं को 'शहादत' की राह पर भेजने में कोई संकोच नहीं होता था, वही अब इस बात से डरा बैठा है कि अगली बारी कहीं उसकी न हो जाए।
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भारत का बदला रुख, चेतावनी नहीं – कार्रवाई
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब आतंक के खिलाफ नीति केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगी, सीधी कार्रवाई होगी। यही वजह है कि मसूद अजहर जैसे खूंखार आतंकी अब ना पाकिस्तान में सुरक्षित हैं, ना अफगानिस्तान में चैन की सांस ले पा रहे हैं।

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