भारत का हाईटेक प्लान; बॉर्डर पर होगा डिजिटल सुरक्षा कवच

ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने के बाद अब भारत अंतरिक्ष में अपनी सैन्य ताकत को और अधिक मजबूत करने में जुट गया है। सरकार की योजना है कि आने वाले चार वर्षों में यानी वर्ष 2029 तक भारत कुल 52 स्पेशल डिफेंस सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजेगा। ये सभी सैटेलाइट्स भारत की सीमाओं पर खास तौर पर चीन और पाकिस्तान से लगते बॉर्डर क्षेत्रों में चौकसी रखने के लिए बनाए जा रहे हैं।

इन सैटेलाइट्स की खासियत यह है कि ये सभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित होंगे और रियल टाइम डेटा प्रदान करेंगे। इसके जरिए न केवल दुश्मन की हलचल पर तुरंत नज़र रखी जा सकेगी, बल्कि भारतीय सेनाओं को बेहतर रणनीतिक निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।

यह महत्त्वाकांक्षी योजना भारत की डिफेंस स्पेस एजेंसी के तहत संचालित की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में पिछले वर्ष अक्टूबर में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने इस परियोजना को हरी झंडी दी थी। इस मिशन के लिए सरकार ने लगभग 26968 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

इस योजना में इसरो की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसरो 21 सैटेलाइट्स तैयार करेगा और उन्हें लॉन्च भी करेगा जबकि शेष 31 सैटेलाइट्स का निर्माण और तैनाती भारतीय प्राइवेट कंपनियों द्वारा की जाएगी। इसका उद्देश्य है कि स्वदेशी तकनीक और निजी क्षेत्र को इस रणनीतिक अभियान में जोड़ा जाए जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।

इन सैटेलाइट्स को लो-अर्थ ऑर्बिट और जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में तैनात किया जाएगा। पहला सैटेलाइट अप्रैल 2026 में लॉन्च किया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार इसकी समय सीमा और घटाने की दिशा में भी काम कर रही है ताकि योजना को शीघ्र गति दी जा सके।

यह मिशन स्पेस बेस्ड सर्विलांस यानी एसबीएस के तीसरे चरण के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य चीन और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी को मजबूत करना है। ये सैटेलाइट्स अंतरिक्ष से भारतीय सैन्य बलों के लिए आंख और कान की भूमिका निभाएंगे।

इसके साथ ही भारतीय वायुसेना तीन हाई अल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम एयरक्राफ्ट्स की भी तैयारी कर रही है जो लगातार निगरानी में मदद करेंगे। इस पूरी योजना के पीछे उद्देश्य है कि भारत अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति को मजबूती से स्थापित करे। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि जैसे-जैसे ये 52 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में सक्रिय होंगे, भारत की सुरक्षा क्षमता उतनी ही सशक्त होती जाएगी।

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उल्लेखनीय है कि चीन ने बीते एक दशक में अंतरिक्ष शक्ति में बड़ी छलांग लगाई है। जहां वर्ष 2010 में उसके पास मात्र 36 सैन्य सैटेलाइट्स थे, वहीं अब यह संख्या 1000 से अधिक हो चुकी है। इनमें से 360 से ज्यादा सैटेलाइट्स केवल निगरानी के लिए हैं। इसके अतिरिक्त चीन के पास एंटी सैटेलाइट मिसाइलें, को ऑर्बिटल सैटेलाइट्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और लेजर तकनीक आधारित हथियार भी मौजूद हैं। भारत की यह नई योजना न केवल सैन्य तैयारियों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि उसे वैश्विक स्तर पर रणनीतिक रूप से और अधिक सशक्त बनाएगी।

Editorial

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