गौतम गंभीर



भारतीय क्रिकेट टीम इस समय इंग्लैंड के दौरे पर है और पहला टेस्ट मैच हारने के बाद अब उसकी नजर बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट पर है। लेकिन इस मैच में सबसे ज्यादा निगाहें होंगी टीम के नए कोच गौतम गंभीर पर, जिनके लिए यह असल मायनों में ‘अग्निपरीक्षा’ साबित हो सकती है। कप्तान शुभमन गिल और कोच गंभीर दोनों ने यह बार-बार दोहराया है कि इस सीरीज में भारत को हर हाल में 20 विकेट लेने होंगे। अब सवाल यह है कि क्या कोच गौतम गंभीर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में जोखिम लेने को तैयार हैं?


गिल-गंभीर की जोड़ी और नई सोच

जब से शुभमन गिल को टेस्ट कप्तानी सौंपी गई है और गौतम गंभीर कोच बने हैं, तब से टीम की रणनीति में स्पष्ट रूप से एक आक्रामक सोच देखने को मिल रही है। दोनों का मानना है कि टेस्ट मैच जीतने के लिए सबसे जरूरी चीज होती है – विपक्षी टीम के सभी 20 विकेट लेना। इस सोच के तहत गिल ने यह भी कहा कि वह चार पुछल्ले बल्लेबाज़ों के साथ भी उतरने को तैयार हैं, बशर्ते 20 विकेट लिए जा सकें।


हेडिंग्ले में मिली हार और सीख

लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट में भारतीय टीम की गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों ही नाकाम रही। शार्दुल ठाकुर को ऑलराउंडर के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन उन्होंने पहली पारी में सिर्फ 1 और दूसरी में 4 रन बनाए। गेंदबाजी में भी वह प्रभावशाली नहीं दिखे और पूरे मैच में उन्हें सिर्फ 16 ओवर ही फेंकने दिए गए। इस प्रदर्शन ने टीम मैनेजमेंट को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अगले मैच में ठाकुर की जगह कोई प्रभावी गेंदबाज या फिर एक विशेषज्ञ स्पिनर – जैसे कुलदीप यादव – को शामिल किया जाना चाहिए।


क्या कुलदीप यादव को मिलेगा मौका?

कोच गौतम गंभीर के सामने यह बड़ा फैसला होगा कि क्या वो कुलदीप यादव जैसे कलाई के स्पिनर को प्लेइंग इलेवन में जगह दें। कुलदीप का टेस्ट रिकॉर्ड शानदार है – 13 टेस्ट में 22.16 की औसत से विकेट। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने हाल में भारत में खेले गए टेस्ट सीरीज में 19 विकेट झटके थे और धर्मशाला टेस्ट में प्लेयर ऑफ द मैच भी रहे थे।

कुलदीप की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे हवा में गेंद को दोनों ओर घुमा सकते हैं, जो ‘बैजबॉल’ रणनीति अपनाने वाले इंग्लैंड के खिलाफ कारगर हो सकता है। फिंगर स्पिनर के मुकाबले कलाई के स्पिनर के खिलाफ आक्रामक रिवर्स स्वीप या स्वीप शॉट खेलना ज्यादा जोखिमभरा होता है, जैसा कि जडेजा के खिलाफ इंग्लैंड के 39 रिवर्स स्वीप प्रयासों से साफ दिखा।


निचले क्रम की बल्लेबाजी बनाम विकेट लेने की क्षमता

गंभीर के सामने यह चुनौती है कि वे निचले क्रम की बल्लेबाजी के मोह में न फंसकर विकेट लेने वाले गेंदबाजों को प्राथमिकता दें। पिछले मैच में भारत ने 41 रन पर 7 और 31 रन पर 6 विकेट गंवा दिए थे, जिससे निचले क्रम की बल्लेबाजी को मजबूत करने की सोच को बल मिल सकता है। लेकिन टेस्ट मैच जीतने के लिए यह मानसिकता छोड़नी होगी। भारत को चाहिए कि वह जडेजा के अलावा चार प्रमुख गेंदबाजों के साथ उतरे।


गंभीर अगर इस चुनौती को स्वीकार करते हैं और कुलदीप यादव को खिलाते हैं तो यह दिखाएगा कि वह साहसिक फैसले लेने वाले कोच हैं।


तेज गेंदबाज या स्पिनर: क्या होगा गंभीर का फैसला?

इंग्लैंड में इस बार गर्मी ज्यादा है और पिचें भी सूखी और सपाट हैं। ऐसे में तेज गेंदबाज या स्पिनर में से किसे खिलाया जाए, यह फैसला पिच को देखकर करना होगा। लेकिन कलाई के स्पिनर को खिलाना एक स्मार्ट चाल हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया के 2005 की एशेज सीरीज की तरह, जब शेन वॉर्न ने सपाट पिचों पर भी 40 विकेट लिए थे, भारत को भी कुलदीप पर भरोसा करना चाहिए।


कोच गंभीर की रणनीति की असली परीक्षा

कोच गौतम गंभीर हमेशा से आक्रामक सोच के लिए जाने जाते रहे हैं – चाहे वह खिलाड़ी के रूप में हों या अब कोच के रूप में। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वे इस सोच को व्यवहार में कैसे बदलते हैं। क्या वह जोखिम लेकर टीम को 20 विकेट दिलवा पाएंगे या फिर वो भी सुरक्षित फैसले लेते रहेंगे?

गंभीर का यह पहला बड़ा विदेशी दौरा है कोच के तौर पर और यहां मिली सफलता या असफलता उनके कोचिंग करियर की दिशा तय कर सकती है। यदि वह कुलदीप यादव जैसे खिलाड़ी को मौका देकर मैच जिताते हैं, तो उन्हें एक रणनीतिक और साहसी कोच के रूप में देखा जाएगा।


एजबेस्टन टेस्ट को सिर्फ एक और मुकाबला नहीं, बल्कि कोच गौतम गंभीर की सोच, उनकी रणनीति और उनके नेतृत्व की कसौटी के रूप में देखा जाना चाहिए। अगर भारत 20 विकेट लेने में सफल होता है, तो गंभीर की विचारधारा को बल मिलेगा। और यदि नहीं, तो सवाल उठेंगे कि क्या प्लेइंग इलेवन का चयन सही था?

भारतीय टीम, कोच गंभीर और कप्तान शुभमन गिल – तीनों के लिए यह मैच निर्णायक साबित हो सकता है।

Editorial

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