ड्रैगन की सोलर स्ट्रैटजी; पानी पर बिजली, पृथ्वी पर प्रभुत्व!
आपने घरों की छतों या खाली ज़मीन पर सोलर पैनल देखे होंगे, लेकिन अब वो दिन दूर नहीं जब आपको सोलर पैनल नदियों, झीलों और समुद्रों की सतह पर तैरते हुए नजर आएंगे। दुनिया का सबसे तेज़ी से ऊर्जा विस्तार करने वाला देश चीन अब इस नई तकनीक में अग्रणी बन चुका है, जहां फ्लोटिंग सोलर पैनल्स यानी पानी पर तैरने वाली सोलर तकनीक को ज़बरदस्त बढ़ावा दिया जा रहा है।
फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी क्या है ?
फ्लोटिंग सोलर पैनल्स वो सौर ऊर्जा सिस्टम हैं जिन्हें झीलों, जलाशयों, नदियों या समुद्र की सतह पर तैनात किया जाता है। ये पैनल फोटोवोल्टिक (PV) तकनीक पर काम करते हैं, जो बिजली उत्पादन के लिए सूरज की रोशनी को सीधा ऊर्जा में बदलते हैं। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भूमि की जरूरत कम होती है, साथ ही पानी की सतह से वाष्पीकरण भी घटता है, जिससे जल संरक्षण में भी मदद मिलती है।
चीन का वैश्विक नेतृत्व :
चीन में फ्लोटिंग सोलर पैनल परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। झेजियांग नहर परियोजना, यांग्त्ज़ी और पर्ल नदी घाटी जैसे क्षेत्रों में पहले ही मत्स्य पालन–सोलर संयोजन प्रणाली लागू हो चुकी है। ये न केवल ऊर्जा उत्पादन में सहायक हैं, बल्कि स्थानीय पर्यावरणीय संरक्षण और मत्स्य पालन को भी बढ़ावा देती हैं।
चीन का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर फार्म :
चीन में स्थित देझोउ डिंगझुआंग फ्लोटिंग सोलर फार्म इस क्षेत्र में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है जिसकी उत्पादन क्षमता 320 मेगावाट है। इसके अलावा चीन ने 2030 तक 1200 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य तय किया है, जिसमें फ्लोटिंग सोलर का योगदान अहम माना जा रहा है।
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समुद्र पर भी दिखा तकनीक का असर :
चीन ने शांदोंग प्रांत में दुनिया की सबसे बड़ी 1 गीगावॉट क्षमता वाली अपतटीय फ्लोटिंग सोलर परियोजना को सफलतापूर्वक शुरू किया है, जिसे एक पुराने जलमग्न कोयला खदान क्षेत्र में स्थापित किया गया है। इसके अलावा उत्तरी सागर में भी कई अपतटीय सोलर पार्क लगाए जा चुके हैं, जो चीन की हरित ऊर्जा क्रांति की दिशा में बड़ा कदम है। यह तकनीक न केवल चीन के ऊर्जा भविष्य को बदल रही है, बल्कि पूरी दुनिया को एक नई दिशा दे रही है , जहां बिजली ज़मीन से नहीं, पानी से निकलेगी!
Editorial

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