Indian Army


जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पूंछ जिलों की नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकी साजिश को भारतीय सेना ने अपनी सतर्कता और साहस से नाकाम कर दिया है। रविवार को एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन के दौरान सेना ने एक पाकिस्तानी नागरिक को धर दबोचा, जिसकी पहचान बाद में “आतंकियों का गाइड” के रूप में हुई। यह व्यक्ति, जिसका नाम मोहम्मद आरिफ है, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के दातोटे गांव का रहने वाला है और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे कुख्यात आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।


कैसे नाकाम हुई घुसपैठ की साजिश

सूत्रों के मुताबिक रविवार दोपहर के समय सेना को नियंत्रण रेखा के पास संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। सेना की त्वरित प्रतिक्रिया के तहत इलाके की निगरानी शुरू की गई और ड्रोन व अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से सीमा पार से घुसपैठ की पुष्टि हुई। इसी दौरान सेना के जवानों ने एक पाकिस्तानी नागरिक को घुसपैठ की कोशिश करते हुए धर दबोचा।

यह व्यक्ति अकेला नहीं था। वह जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों के एक ग्रुप के साथ भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश कर रहा था। लेकिन जैसे ही सेना ने उन्हें ललकारा, आतंकवादी पास की एक खड़ी चट्टान से कूदकर पाकिस्तानी सीमा की ओर भाग निकले। इस दौरान वह घायल हो गए और खून के निशान ड्रोन फुटेज में भी दिखाई दिए।


कौन है आरिफ – आतंकियों का गाइड

गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी नागरिक की पहचान मोहम्मद आरिफ के रूप में हुई है, जो कि PoK के दातोटे गांव का निवासी है। पूछताछ में उसने चौंकाने वाला खुलासा किया कि वह खुद को “आतंकियों का गाइड” मानता है और उसे पाकिस्तान की सेना द्वारा भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने का जिम्मा सौंपा गया था।

आरिफ ने बताया कि उसे इलाके की भौगोलिक जानकारी बहुत अच्छी तरह है और इसी वजह से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी उससे मदद लेते थे। वह पहले भी कई बार आतंकियों को भारत में सुरक्षित घुसाने की कोशिश कर चुका है। इस बार वह एक बार फिर चार आतंकियों के साथ भारत में दाखिल हो रहा था, लेकिन सेना की सतर्कता के चलते उसकी योजना नाकाम हो गई।


आरिफ के पास से बरामद सामान

गिरफ्तारी के वक्त आरिफ के पास से एक मोबाइल फोन और करीब 20,000 पाकिस्तानी रुपये भी बरामद हुए हैं। मोबाइल फोन को जांच के लिए भेजा गया है और इसमें से कई संभावित खुफिया सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि फोन से आतंकी नेटवर्क, संपर्क सूत्रों और भविष्य की योजनाओं से जुड़ी अहम जानकारी मिल सकती है।


पूछताछ में क्या उभर रहा है?

आरिफ से सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गहन पूछताछ की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में उसने यह कबूल किया कि पाकिस्तान की सेना और आईएसआई सीधे तौर पर जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों की मदद कर रही है। आरिफ ने बताया कि उसे बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया था कि किस रास्ते से भारत में घुसपैठ करवाई जाए और कैसे सेना की निगरानी को चकमा दिया जाए।

“आतंकियों का गाइड” होने के नाते वह सीमा पार के आतंकी नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहा था। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि आरिफ जैसे गाइड सीमा पार से घुसपैठ कराने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे क्षेत्र की हर भौगोलिक जानकारी रखते हैं और जंगलों, घाटियों, रास्तों का पूरा नक्शा उन्हें पता होता है।


सेना का बयान: संकल्प और सतर्कता का परिचय

भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन को एक “सफल घुसपैठ रोधी अभियान” करार देते हुए कहा कि यह उनकी प्रतिबद्धता और साहस का परिणाम है। सेना ने बयान में कहा, "हमारी प्राथमिकता भारत की सीमाओं की रक्षा करना है। हर प्रकार की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया जाएगा, चाहे वह किसी भी रूप में हो।"

इस सफलता के बाद सेना ने सीमा पर चौकसी और बढ़ा दी है और LoC पर निगरानी को और सख्त किया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में आतंकी संगठन फिर से घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं।


राजनीतिक और सुरक्षा विश्लेषकों की राय

घटना के बाद कई सुरक्षा विश्लेषकों ने इस ऑपरेशन को भारत की इंटेलिजेंस और सेना के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बताया है। “आतंकियों का गाइड” पकड़े जाने से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान किस तरह से एक सुनियोजित रणनीति के तहत भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे गाइड्स आतंकवाद की रीढ़ होते हैं, क्योंकि बिना उनके आतंकी भारत की सीमाओं के भीतर घुसकर कोई भी कार्रवाई नहीं कर सकते। आरिफ की गिरफ्तारी से न केवल एक संभावित घुसपैठ को रोका गया, बल्कि पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ने में भी मदद मिल सकती है।



मोहम्मद आरिफ की गिरफ्तारी इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि भारत की सीमाओं पर खतरा अब भी बरकरार है और पाकिस्तान लगातार नई चालें चल रहा है। “आतंकियों का गाइड” जैसे लोग सीमा पार से भेजे जा रहे हैं ताकि भारत में दहशत फैलाई जा सके। इस बार भारतीय सेना ने न केवल एक बड़ा हादसा टाल दिया, बल्कि पाकिस्तान की इस नापाक साजिश को दुनिया के सामने उजागर भी किया है।

अब ज़रूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों पर सख्त अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की जाए और पाकिस्तान को आतंकियों का पनाहगार घोषित करने के लिए दबाव बनाया जाए। साथ ही, भारत को भी अपनी सीमाओं पर ऐसी सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाए रखना होगा ताकि कोई भी “आतंकियों का गाइड” देश की शांति और सुरक्षा से खिलवाड़ न कर सके।

Editorial

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