महबूबा का शांति फॉर्मूला;
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर घाटी में शांति की बहाली को लेकर बड़ा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब तक कश्मीरी पंडितों की गरिमापूर्ण और सुरक्षित वापसी नहीं होती, तब तक जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती।

खीर भवानी मंदिर में की पूजा :
गांदरबल जिले के ऐतिहासिक खीर भवानी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद महबूबा मुफ्ती ने संवाददाताओं से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा, “कश्मीरी पंडित इस शुभ अवसर पर यहां आए हैं और हम उनका स्वागत करने आए हैं। पीडीपी ने हमेशा कहा है कि कश्मीरी पंडितों की गरिमापूर्ण वापसी और शांति सबसे जरूरी है। ये सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संतुलन का मामला है।”
“बंदूक से नहीं, राजनीतिक प्रक्रिया से हल होंगे मसले” :
महबूबा ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर के जटिल मुद्दों का समाधान बंदूकों से नहीं हो सकता। “हमारा स्पष्ट मानना है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को हल करने के लिए राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करनी होगी। यह प्रक्रिया तभी पूरी होगी जब हमारे सभी कश्मीरी पंडित भाई-बहन सम्मान और सुरक्षा के साथ घाटी में लौटेंगे। बिना उनके कश्मीर अधूरा है,” उन्होंने कहा।
प्रतीकात्मक वापसी नहीं, वास्तविक एकीकरण चाहिए :
PDP प्रमुख ने यह भी जोर दिया कि कश्मीरी पंडितों की वापसी को महज एक ‘प्रतीकात्मक कदम’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ पुनर्वास का मामला नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के साझा, समावेशी और दूरदर्शी भविष्य के निर्माण का अवसर है। पंडितों का फिर से घाटी में बसना हमारे समाज के घावों पर मरहम लगाने जैसा होगा।”
उपराज्यपाल से की मुलाकात, ईद से पहले रिहाई की मांग :
महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी मुलाकात की और एक प्रस्ताव सौंपा जिसमें ईद से पहले कम गंभीर आरोपों में जेल में बंद युवाओं की रिहाई की मांग की गई। उन्होंने कहा, “जो लोग मामूली आरोपों के तहत जेलों में बंद हैं, उन्हें रिहा करना इंसानियत और भरोसे की बहाली के लिए जरूरी कदम होगा।”
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सियासत से ऊपर उठकर बयान :
महबूबा मुफ्ती का यह बयान घाटी में एक बार फिर उस मुद्दे को केंद्र में ले आया है, जो दशकों से राजनीतिक दायरों में बहस का विषय रहा है – कश्मीरी पंडितों की वापसी। जहां एक ओर सरकार पंडितों के पुनर्वास की योजनाएं बना रही है, वहीं महबूबा का यह स्पष्ट और सशक्त बयान बताता है कि पीडीपी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से देखती है।
महबूबा मुफ्ती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन घाटी में स्थायी शांति और समावेशी विकास को लेकर प्रयासरत है। उनका यह रुख इस दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक संकेत माना जा रहा है, जिससे भविष्य की रणनीति और संवाद की दिशा तय हो सकती है।
Editorial

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